ग्रामीणों को बड़ी आस थी कि साहब आएंगे और उनकी शिकायतें चुटकी बजाते निपट जाएंगी। साहब आए भी, लेकिन चुटकी बजाते निकल लिए। कुछ ऐसी ही सीन सोमवार को लोहिया गांव देवरी में देखने को मिली। डीएम की अनुपस्थित में लोहिया गांव देवरी पहुंची सीडीओ ने फटाफट ग्रामीणों की शिकायतें सुनीं, आश्वासन दिया और चल दीं। यह स्थिति तब रही जब गांव में उनके रात्रि विश्राम का कार्यक्रम था। इस दौरान विभिन्न विभागों की शिकायतों पर केवल जांच कराने का आश्वासन देकर ग्रामीणों को शांत करा दिया। आंगनबाड़ी केंद्र में पोषाहार वितरण न कराए जाने की शिकायत पर सीडीओ ने मात्र नाराजगी ही जताई।
सोमवार को विकासखंड के समग्र लोहिया गांव देवरी में रात्रि विश्राम कर डीएम को स्थलीय सत्यापन करना था, लेकिन अचानक उनका कार्यक्रम बदल गया और सीडीओ संदीप कौर को गांव पहुंचने के निर्देश दिए। सोमवार दोपहर लगभग एक बजे सीडीओ ने गांव पहुंचकर गांधी प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और इसके बाद जन चौपाल शुरू हुई। निरीक्षण के दौरान कई खामियां सामने आई। कृषि विभाग के अधिकारी मृदा परीक्षण के दावे करते रहे, लेकिन किसान कार्ड नहीं दिखा सके। चौपाल में सीडीओ ने ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं। सभी विभागीय योजनाओं की जानकारी संबंधित अधिकारियों ने दी। राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना के तहत यहां पर महज दो ही कनेक्शनधारक मिले। ग्रामीणों ने गांव में प्राथमिक विद्यालय न होने की समस्या अधिकारियों के सामने उठाई। इस पर खंड शिक्षाधिकारी ने जवाब दिया कि 500 मीटर की दूरी पर स्कूल है, नया स्कूल नहीं बन सकता है। ग्रामीणों ने गांव में शेष दो सीसी रोड के निर्माण कराए जाने की मांग की। इस पर अवर अभियंता ने बताया कि जिले से धन की मांग की गई है। पैसा मिलते ही निर्माण कार्य कराया जाएगा।
इंसेट-1
परिवारों के सापेक्ष कम मिले शौचालय
यहां पर 13 इंदिरा आवास पूर्ण पाए गए। कुल 95 स्वच्छ शौचालय ही बने मिले। 125 परिवारों के सापेक्ष शौचालयों की संख्या कम होने पर सीडीओ ने कहा कि जो भी ग्रामीण शौचालय बनवाना चाहता है तो वह बीडीओ के माध्यम से डीपीआरओ को आवेदनपत्र भिजवाएं।
निरीक्षण के दौरान सीडीओ ने मौजूद रोजगार सेवक से मनरेगा के तहत खड़ंजा निर्माण की कुल दूरी के बारे में पूछा तो वह बगलें झांकने लगा। इस पर सीडीओ ने उसे फटकार लगाई। ग्रामीणों द्वारा वृद्धावस्था पेंशन की भी शिकायतों से सीडीओ को अवगत कराया। हालांकि रात्रि विश्राम की बजाए दिन में ही मात्र ढाई घंटे में जन चौपाल निपटाने को लेकर ग्रामीणों में खासी चर्चाएं होती रहीं। मनरेगा के तहत मात्र दो-तीन ही जॉबकार्डधारकों के मौजूद रहने पर सीडीओ ने रोजगार सेवक को आड़े हाथों लिया। उन्होेंने ग्रामीणों को बताया कि यदि जॉबकार्डधारक मनरेगा के तहत 50 दिन काम कर लेता है तो उसके बाद वह श्रम विभाग में रजिस्ट्रेशन से 14 योजनाओं का लाभ उठा सकता है।