घंटों इंतजार के बाद कम कैश मिलने से नाराज महिलाओं ने बांगरमऊ की एक बैंक में हंगामा कर दिया। महिलाओं और बैंक कर्मियों के बीच कहासनी और धक्कामुक्की भी हुई। बैंक कर्मियों ने मोर्चा संभाला तो महिलाओं ने बैंक गेट पर ताला बंद कर नारेबाजी शुरू कर दी ही। पुलिस ने पहुंचकर ताला खुलवाया और हालात सामान्य कराएं।
बांगरमऊ कस्बे की पंजाब नेशनल बैंक में सुबह से कतार में खड़े रहने के बाद केवल 2000 रुपये मिलने पर महिलाओं का गुस्सा फूट पड़ा। आजिज महिलाओं ने बैंक गेट में ताला जड़कर हंगामा शुरू कर दिया। बैंक कर्मियों ने विरोध जताया तो खरीखोटी सुनाने लगे। तीखी नोकझोंक के बाद शाखा प्रबंधक ने मामले की जानकारी पुलिस को दी। सूचना पर पहुंची पुलिस ने महिलाओं को तितर बितर कर ताला खुलवाया। महिलाओं के व्यवहार से खफा शाखा प्रबंधक उमाशंकर वर्मा ने एक नामजद महिला व 14 अज्ञात महिलाओं के खिलाफ तहरीर दी है।
बांगरमऊ कोतवाली प्रभारी भूपेंद्र राठी ने बताया कि पीएनबी में हंगामा नहीं हुआ है। कुछ महिलाओं ने बैंक गेट में ताला डालने का प्रयास किया था। तहरीर मिलने पर मामले की जांच की जा रही है। अभी रिपोर्ट नहीं दर्ज की गई है।
एसबीआई को 40 करोड़ तो आरबीआई से मिल गए मगर हालात अभी भी नहीं सुधरे हैं। एसबीआई के साथ-साथ पीएनबी में पेंशनर्स, वेतनभोगियों के साथ ही सामान्य खाताधारक को 24 हजार की नगदी नसीब नहीं हो सकी। बैंकों में करेंसी की किल्लत के साथ अधिकतर एटीएम बूथ डिब्बा बने हैं। लोगों को दो-चार हजार रुपये के लिए भी बैंकों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। करेंसी की किल्लत से लोग बेहाल हैं।
नोटबंदी के बाद से करेंसी की किल्लत बैंकों में बरकरार है। पीएनबी समेत अन्य बैंकों के अधिकारी अभी भी करेंसी के लिए आरबीआई के चक्कर काट रहे हैं। शुक्रवार एसबीआई मुख्य शाखा ने दोपहर तक तो 24 हजार का पेमेंट लोगों को किया लेकिन बाद में हाथ सिकोड़ लिए। वहीं पीएनबी, बीओआई, बैंक आफ बड़ौदा की शाखा में बमुश्किल लोगों को पांच से सात हजार का भुगतान हुआ। इससे भी बुरा हाल ग्रामीण क्षेत्र की बैंकों का रहा। जहां खाताधारक को घंटों लाइन में धक्का मुक्की झेलने के बाद दो से चार हजार का भुगतान ही मिला। बैंकों में नगदी न होने के साथ ही आईसीसीआई, एचडीएफसी, एक्सिस बैंक,कचहरी स्थित एसबीआई, यूनियन बैंक एटीएम, बैंक आफ बड़ौदा एटीएम की बंदी ने लोगों को खूब छकाया।
बैंकों में अगले तीन दिन छुट्टी लोगों की मुसीबत और बढ़ाएगी। अगर एटीएम से रुपये नहीं मिले तो हालात और खराब होंगे।
मालूम हो कि शनिवार को दूसरा शनिवार होने से छुट्टी रहेगी। इसके बाद रविवार को साप्ताहिक अवकाश है जबकि सोमवार को बारावफात की छुट्टी है। यानी तीन दिनों तक लगातार बैंकें बंद रहेंगी और जमा-निकासी नहीं हो पाएगी। वहीं लगातार खाली चल रहे एटीएम में करेंसी नहीं डाली गई तो लोगों की मुश्किलें और बढ़ेंगी।
नेहरूयुवा केंद्र की ओर से आयोजित संगोष्ठी में मेरा मोबाइल, मेरा बैंक व कैशलेस भुगतान के प्रति जागरूक किया गया। इस दौरान युवा, महिला मंडल प्रमुखों को खेलकिट दी गई। युवाओं द्वारा तैयार सामग्री का प्रदर्शन लोगों ने खूब सराहा।
निराला प्रेक्षागृह परिसर में गोष्ठी में मुख्य अतिथि सीडीओ संजीव सिंह व एडीएम बीएन यादव पहुंचे। युवा, युवती मंडलों एवं वस्त्र मंत्रालय के सहयोग से संचालित चिकन, जरी, जरदोजी प्रशिक्षण की प्रतिभागी महिलाओं द्वारा लगाई युवा कृति प्रदर्शनी देखी। तैयार सामग्री व उनके प्रयास की प्रशंसा की। उमंग आर्ट एवं क्राफ्ट ग्रुप द्वारा अखबार एवं घास से बनाए गए शोपीस को सराहा।
कार्यक्रम का मुख्य उद्ेदश्य हस्तशिल्पियों के कौशल में वृद्धि कर युवाओं को स्वावलंबी बनाने को प्रोत्साहित करना है। जिला युवा समन्वयक आराधनाराज ने मेरा मोबाइल, मेराबैंक और कैशलेस भुगतान के विषय में विस्तार से बताया। सीडीओ ने कहा कि ग्रामस्तर पर खुले में शौच मुक्ति के लिए जागरुकता अभियान सराहनीय है। इससे आर्थिक एवं सामाजिक विकास में भी मदद मिलेगी। इस मौके पर जिला सूचना विज्ञान अधिकारी शरद निगम, स्वच्छ भारत मिशन के जिला समन्वयक अभय कुमार सिंह, सर्वेश शुक्ला, अनिल कुमार पांडेय, डा. मनीष दीक्षित, रूप किशोर तिवारी, मनीष सिंह सेगर भी मौजूद रहे।
बारावफात के त्योहार पर इस बार नोटबंदी की मार पड़ी है। इस त्योहार पर शहर के मुख्य चौराहाें पर बनने वाले स्वागत द्वार बनाए नहीं जा रहे हैं। बैंकों से पर्याप्त धनराशि न निकल पाने से आयोजकों ने स्वागत द्वार न बनवाने का फैसला लिया है।
आयोजक कंजी मोहल्ला निवासी मो. फारुख और राजू ने बताया कि वह लोग हर साल आईबीपी चौराहे पर विशाल स्वागत द्वारा का निर्माण कराते रहे हैं। जुलूस के स्वागत का भी पूरा इंतजाम किया जाता रहा है। लेकिन इस बार हजार व पांच सौ के नोट बंद होने के कारण लोगों से चंदा नहीं मिल पाया है। इससे गेट नहीं बनवाने का फैसला लिया गया है। बताया कि इस स्वागत द्वार को बनवाने में करीब तीन लाख का खर्च आता है और इस बार चंदा काफी कम हो सका है। इस कारण से गेट निर्माण न कराकर सिर्फ जुलूस के स्वागत का इंतजाम किया जाएगा।