नोट की चोट के बाद भी लोगों की दुश्वारियां 37 वें दिन भी ज्यों का त्यों बरकरार रहीं। कैश की उम्मीद के साथ लोग सुबह से ही बैंक की कतारों में लग गए। बैंक के शटर खुलते ही पहले प्रवेश के लिए मारामारी मची। भीड़ को नियंत्रित करने में बैंक स्टाफ व गार्ड को काफी जद्दोजहद उठानी पड़ी। एसबीआई व पीएनबी में धक्कामुक्की के बीच काउंटर पर पहुंचे खाताधारकों तब तेज झटका लगता जब पता चला कि किसी को भी 10 हजार से ज्यादा का भुगतान नहीं हो रहा है। दवा, बच्चों की फीस आदि समस्याओं की गुहार लगाकर लोग 24 हजार भुगतान की मांग किए तो मैनेजर ने कैश कमी की बात कह लोगों को शांत करने का प्रयास किया। एसबीआई मुख्य शाखा के साथ ही पीएनबी, बैंक आफ इंडिया, इलाहाबाद बैंक, देना बैंक में खाताधारकों को पांच हजार से अधिक का भुगतान नहीं हो सका। इसके अलावा बैंक आफ बड़ौदा में कैश न होने से लोग खाली हाथ लौटने को मजबूर हुए। बैंकों में करेंसी की कमी के बीच एटीएम में भी कैश न होना लोगों में बड़ी मुसीबत का सबब बना।
बैंकों में हो रही मनमानी, डीएम से करेंगे शिकायत
भगवंतनगर। नोटबंदी की समस्या को बैंक प्रबंधकों व स्टाफ की मनमानी ने और बढ़ा रखा है। परेशान खाताधारकों ने बताया कि चहेतों की स्टाफ के साथ जुगलबंदी से 24 हजार का भुगतान मिल जाता तो वहीं आमजन को दो हजार का भुगतान नहीं हो पा रहा है। गुरुवार की दोपहर भगवंतनगर स्थित पंजाब नेशनल बैंक में दोपहर के समय कतार में लगे कुछ ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि बैंक कर्मी चहेतों को 24 हजार का भुगतान कर रहे हैं। जबकि साधारण खाताधारकों को दो हजार का भुगतान भी मुश्किल से मिल पा रहा। लोगों ने डीएम से शिकायत करने की बात कही। तो वहीं शाखा प्रबंधक आरपी सिंह ने आरोपों को निराधार बताया।