उन्नाव। सीबीएसई की तर्ज पर वर्ष 2015-16 के लिए शुरू हुआ नया सत्र परवान नहीं चढ़ पा रहा है। विद्यालयों की स्थिति यह है कि जिले में संचालित सरकारी व सहायता प्राप्त कई ऐसे विद्यालय हैं जहां अभी तक किताबें ही नहीं खुली हैं। प्रवेश प्रक्रिया भी लचर तरीके से चल रही है।
प्रधानाचार्यों का कहना है कि जब तक मूल्यांकन कार्य पूरा नहीं हो जाता तब तक गति में तेजी भी नहीं आ सकती। विद्यालय में एक दो टीचरों को छोड़कर शेष टीचरों की ड्यूटी तो मूल्यांकन कार्य में ही लगी हुई है। ऐसे में पढ़ाई तो दूर प्रवेश लेने में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। विद्यालयों की स्थिति यह है कि बच्चे तो आते हैं कि लेकिन टीचरों के न होने से उन्हें वापस लौटना पड़ता है।
नए शैक्षिक सत्र में कक्षा छह से नौ व ग्यारह तक के छात्र-छात्राओं का प्रवेश 15 अप्रैल तक विद्यालयों में हो जाना चाहिए था। 20 अप्रैल तक स्टाफ मीटिंग के साथ ही महत्वपूर्ण बिंदुआें को अवगत कराए जाने से लेकर समितियों का गठन, प्रयोगशालाओं की तैयारी के अलावा प्रत्येक विषय के कार्य का मासिक विभाजन करना था। लेकिन स्थिति यह है कि अन्य गतिविधियां तो दूर प्रवेश प्रक्रिया ही विद्यालयों में गति नहीं पकड़ पाई है।
सीन नंबर- 1
स्थान- अटल बिहारी इंटर कालेज
समय- 11.20 एएम
- विद्यालय परिसर में कक्षा छह से बारह तक की कक्षाएं खाली थीं। प्रिंसिपल अजब सिंह कार्यालय में बैठे थे। उन्होंने बताया कि विद्यालय में पढ़ाने वाले टीचरों की ड्यूटी मूल्यांकन कार्य में लगी हुई है। मैं ही विद्यालय आने वाले छात्र-छात्राआें को फिजिक्स पढ़ा रहा हूं। इसके साथ ही जो बच्चे प्रवेश लेने आते हैं उनको भी देखना पड़ता है। उनका भी कहना था कि नए सत्र में दिक्कतें आ रही हैं। जब टीचर ही नहीं है तो बच्चों को घर भेज दिया जाता है। टीचरों के आने के बाद ही कार्य में तेजी आएगी।
सीन नंबर- 2
स्थान- कमलापति इंटर कालेज बीघापुर
समय- 12.10 पीएम
विद्यालय परिसर में सन्नाटा था। कार्यालय के अंदर बैठे बाबू दिलीप बाजपेई ने बताया कि विद्यालय के प्रिंसिपल दिलीप बाजपेई समेत 21 टीचरों की ड्यूटी मूल्यांकन कार्य में लगी हुई है। इससे अभी न तो पढ़ाई हो रही है और न ही प्रवेश लिए जा रहे हैं। बाबू का कहना था कि प्रवेश लेने के लिए जो बच्चे विद्यालय आ रहे हैं उनको प्रवेश फार्म दिया जा रहा है। 21 अप्रैल से प्रवेश प्रक्रिया की शुरुआत की जाएगी।
1500 टीचर कर रहे मूल्यांकन
जीआईसी उन्नाव, जीजीआईसी उन्नाव व जीआईसी चमरौली के मूल्यांकन केंद्रों पर इस समय लगभग पंद्रह सौ टीचर मूल्यांकन कार्य में लगे हुए हैं। इससे सरकारी व साहयता प्राप्त विद्यालयों में बच्चों के प्रवेश नहीं हो पा रहे हैं। इसका फायदा जिले में संचालित वित्तविहीन विद्यालयों को मिल रहा है। पढ़ाई लेट होने से अभिभावक बच्चों के भविष्य को देखते हुए कान्वेंट विद्यालयों में उनके प्रवेश करा रहे हैं।
क्या बोले जिम्मेदार
डीआईओएस शफीक मोहम्मद सिद्दीकी ने भी स्वीकारा, कि मूल्यांकन के चलते कई विद्यालयों में प्रवेश प्रक्रिया प्रारंभ नहीं हो पाई है। 18 अप्रैल तक मूल्यांकन कार्य किया जाना है। सभी बच्चों का प्रवेश हो सके इसके लिए अप्रैल के अंत तक प्रवेश प्रक्रिया जारी रखी जाएगी।