शहर में बड़ी संख्या में ऐसे जर्जर भवन हैं जिन्हें बने सैकड़ों वर्ष बीत चुके हैं। पुरानी इमारतों की दीवारों में दरारें पड़ गई हैं। छज्जों का हिस्सा अक्सर टूटकर मुख्य मार्गों पर गिरता रहता है। जिससे आए दिन इनके नीचे से निकलने वाले राहगीर चुटहिल भी होते रहते हैं। शहर के अति व्यस्त धवन रोड, बस स्टैंड बाजार पर दर्जनों की संख्या में जर्जर भवन हैं। हाल यह है कि इनमें कई इमारतें कभी भी जमींदोज हो सकती हैं और जान-माल का खतरा बढ़ सकता है। इसके अलावा बारिश में जर्जर भवनों की छतें भी टपकती रहती हैं। इस दयनीय स्थिति को देख इनमें रहने वाले लोगों ने दूसरे स्थानों पर निवास करने की ठान ली है। लेकिन इनमें बनी दुकानों में व्यापार कर रहे लोग व इनके किराएदार कम किराया होने के चलते पैसों के लालच में इन मकानों को छोड़ नहीं रहे हैं। शहर के व्यस्ततम व भीड़-भाड़ वाले क्षेत्रों में बने इन भवनों से कभी भी किसी बड़े हादसे की आशंका बनी रहती है। लेकिन इस ओर विभागीय अधिकारी भी ध्यान नहीं दे रहे हैं।
चिह्नित कर थमाया जाएगा नोटिस
ऐसे जर्जर मकानों की समय-समय पर जांच करवाकर मकान मालिकों के नोटिसें भेजने का काम पालिका की ओर से किया जाता है। वर्तमान में जर्जर मकानों को चिह्नित करने का काम विभाग के अधिकारियों को सौंपा जाएगा। जांच करवाकर नोटिस भेजी जाएंगी। अगर भवन स्वामी खुद इनकी मरम्मत नहीं करवाते हैं तो विभाग की ओर से इनका ध्वस्तीकरण करवाया जाएगा। नरेंद्र मोहन मिश्र, ईओ, नगर पालिका-उन्नाव।