उन्नाव। सरकारी कार्यालयों में शारीरिक रूप से अक्षम्य (विकलांग) लोगों के लिए यूरोपियन स्टाइल के शौचालय बनवाए जाएंगे। केंद्र सरकार ने इसके लिए नई गाइड लाइन तैयार की है।
सरकारी दफ्तरों चाहे वह केन्द्र सरकार के हो या प्रदेश सरकार के, किसी में भी विकलांगों के लिए अलग शौचालय की व्यवस्था नहीं है। अधिकतर शौचालय देसी स्टाइल के बने हुए हैं जो पूरी तरह से आम जनता के लिए ही हैं।
यदि कोई विकलांग इन सरकारी कार्यालयों में पहुंच जाता है तो शौचालय आदि के लिए जाने पर उसे काफी दिक्कतें उठानी पड़ती हैं। इस मामले को केंद्र सरकार ने संज्ञान में लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वच्छ भारत मिशन अभियान के तहत विकलांगों के लिए सरकारी कार्यालयों में यूरोपियन स्टाइल का कमोड रखा जाएगा। कमोड के दोनों तरफ विकलांगजनों को पकड़ने के लिए हत्थे लगाए जाएंगे।
इन शौचालयों में दरवाजों की भी एक निश्चित चौड़ाई 900 एमएम रखी जाएगी। शौचालय पूर्णतया हवादार और स्वच्छ बनाया जाएगा साथ ही 24 घंटे पानी की व्यवस्था रहेगी।
सचिव भारत सरकार आरआर मीना ने प्रदेश के ग्राम्य विकास विभाग के प्रमुख सचिव को पत्र भेजा है। बताया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सपना है कि वर्ष 2019 तक जब देश के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती होगी तब तक देश को स्वच्छ बनाना है।
इस मंशा के तहत विकलांगों के लिए कार्यालयों में सुगम्य शौचालयों का निर्माण कराया जाना है। शौचालय ऐसे होने चाहिए जिसमें विकलांगजनों को किसी प्रकार की दिक्कत न हो। ऐसे शौचालयों का निर्माण कार्य तुरंत शुरू कराया जाए।