सफीपुर। युवक की हत्या की तहरीर मिलने के बाद भी एफआईआर दर्ज न करने पर एसपी ने आसीवन एसओ को लाइन हाजिर कर दिया है। युवक सड़क किनारे घायल मिला था और 21 दिन बाद लखनऊ में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी। इस मामले में परिजनों ने जाम लगाकर प्रदर्शन भी किया था।
आसीवन थानाक्षेत्र के बारीथाना गांव निवासी सुरेंद्र पाल (35) लखनऊ में फल का ठेला लगाते थे। दिवाली पर घर आए थे। 31 अक्तूबर की शाम सात बजे आसीवन जाने का बात कह बाइक से निकले थे, लेकिन घर नहीं पहुंचे थे। रात में गश्त कर रही पुलिस ने बांगरमऊ-लखनऊ मार्ग पर मुशीराबाद गांव के पास सड़क किनारे घायल अवस्था में पड़ा देखा था और परिजनों को सूचना देकर सीएचसी पहुंचाया था। वहां से लखनऊ ट्रामा सेंटर रेफर किया गया था।
सुरेंद्र के भाई नरेंद्र ने आठ नवंबर को पुलिस को तहरीर दी थी कि भाई के गर्दन और चेहरे पर धारदार हथियार से वार के साथ खरोंच के निशान हैं। हत्या का शक जताते हुए अमानखेड़ा गांव निवासी बबोल पाल, राधेश्याम पाल और रामनिवास पाल के खिलाफ तहरीर दी थी। उसके बाद भी पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज नहीं की थी। 22 नवंबर को सुरेंद्र की इलाज के दौरान मौत हो गई थी। शाम चार बजे परिजन शव लेकर आए थे और बांगरमऊ-लखनऊ मार्ग पर रख जाम लगा दिया था। सीओ बांगरमऊ अरविंद चौरसिया मौके पर पहुंचे थे और परिजनों को तहरीर के आधार पर नामजद आरोपियों पर गैर इरादतन हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई थी, साथ ही जाम लगाने वालों के खिलाफ भी अज्ञात में रिपोर्ट दर्ज हुई थी। एसपी दीपक भूकर ने बताया कि घटना की सीओ से जांच कराई गई तो पुलिस की लापरवाही सामने आई। इस पर एसओ ज्ञानेंद्र सिंह को लाइन हाजिर कर दिया गया है।
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दुधमुंही बच्ची के चूल्हे में फेंकने की घटना में भी चर्चा में थे
सफीपुर। आसीवन थानाक्षेत्र के गांव कायमपुर निबरवारा में आठ नवंबर को पांच दिन की दुधमुंही बच्ची आग से झुलस गई थी। एसओ ने बच्ची की मां रोशनी पर जलते चूल्हे में फेंकने के आरोप में रिपोर्ट दर्ज की थी। पुलिस पर आरोप लगा था कि पति की तहरीर पर बिना जांच के ही महिला को जेल भेज दिया गया। राज्य महिला आयोग की सदस्य ने भी सवाल उठाए थे। (संवाद)