उन्नाव। प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी आसरा आवास योजना के तहत दिए जाने वाले 1166 आवासों के लिए लाभार्थियों को इंतजार करना पड़ सकता है। दो साल से बनाए जा रहे इन आवासों में भवनों का निर्माण तो हो गया है लेकिन अभी तक प्लास्टर तक नहीं हुआ है।
समस्या यही खत्म नहीं होती आवासों के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे बिजली, पानी व सड़क की व्यवस्था के लिए काम तक नहीं शुरू हो सका है। इतना ही नहीं बीघापुर व मोहान में तो अभी तक भवन तक बनना नहीं शुरू हुए हैं। डूडा द्वारा मूलभूत सुविधाओं के लिए जल्द प्रस्ताव तैयार करके शासन को भेजने की बात परियोजना अधिकारी ने कही है।
प्रदेश सरकार ने योजना को अमलीजामा पहनाकर जनवरी 2013 में लांच किया था। योजना के तहत आसरा आवास नगरीय क्षेत्र के अल्पसंख्यक बहुल व मलिन बस्तियों में रहने वाले बेघर अल्पआय (6000 रुपये प्रतिमाह से कम) मेहनतकश परिवारों को दिया जाना है।
योजना का लाभ लेने के लिए नगरीय निकायों में पंजीकृत रिक्शा चालक, ओबीसी, एससी के बेघर बीपीएल कार्ड धारक व्यक्तियों को आवेदन करना था। शर्त यह भी थी कि आवेदन करने वाले व्यक्ति को किसी अन्य योजना के तहत आवास का लाभ न मिला हो।
जनपद के सात ब्लाकों में कुल 1166 आवासों को बनाने की रूपरेखा भी तैयार हुई और शासन ने शुरुआती दौर में इसके लिए करोड़ों का बजट भी पास कर दिया। लेकिन जो पैसा मिला उससे भवनों का ही निर्माण हो सका, जबकि अभी तक प्लास्टर तक कई भवनों में नहीं हो सके हैं।
बीघापुर व मोहान में भवन तक बनने नहीं शुरू हुए। इसके अलावा बिजली, पानी व सड़क जैसी मूलभूत सुविधा विकसित करने के लिए अभी तक शासन को प्रस्ताव तक नहीं भेजा गया है। हालांकि अधिकारी एक-दो दिन में प्रस्ताव भेजने की बात कह रहे हैं। ऐसे में आसरा का आसरा लगाए लोगों को अभी लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।
अकेले भवन निर्माण पर 4617.36 लाख होंगे खर्च
उन्नाव। डूडा द्वारा बनवाए जा रहे प्रत्येक आसरा आवास की कीमत 3.96 लाख रुपए तय हुई है। ऐसे में 1166 आवासों के निर्माण पर कुल 4617.36 लाख रुपया खर्च किया जाना है। इंफ्रास्ट्रक्चर पर जो खर्च होगा वह अलग है। सूत्रों की माने तो योजना को लांच करते समय प्रत्येक आवास के लिए 2.96 लाख रुपया तय हुआ था। जिसे बाद में बढ़ाकर 3.96 लाख रुपया कर दिया गया। इतना ही नहीं आसरा आवास का क्षेत्रफल इंदिरा व लोहिया आवास से भी ज्यादा बताया गया है।