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समायोजन व स्थानांतरण में विभाग कर रहा मनमानी

Mon, 25 May 2015 12:04 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, उन्नाव
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बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों की मनमानी के चलते विभागीय समायोजन व स्थानांतरण प्रक्रिया में मानकों की धज्जियां उड़ाई जा रहीं हैं। कहीं 45 छात्र संख्या वाले विद्यालय में चार टीचरों की तैनाती की गई है तो कहीं 65 छात्रों को मात्र एक प्रधान टीचर के जिम्मे सौंप दिया गया है।
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विभाग में लिंक यानि पैठ का जबरदस्त खेल चल रहा है। ऐसे टीचर जिनकी विभागीय अधिकारियों मेें पैठ है, नजदीक के स्कूलों में तैनाती लेकर मौज काट रहे हैं। वहीं, जिनका कोई लिंक नहीं है उनकी तैनाती कई किलोमीटर दूर कर दी जाती है। ऐसे में विभागीय कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है।

विकास खंड नवाबगंज के गांव गोरिंदा में संचालित उच्च प्राथमिक विद्यालय में छात्र संख्या 45 है। यहां टीचरों में अरुण कनौजिया, सफीना बानो व शैलेंद्र सिंह की तैनाती है। उसके बाद भी इस विद्यालय में सोहरामऊ प्राथमिक विद्यालय की हेड टीचर सुषमा कनौजिया को यहां सहायक टीचर बनाकर स्थानांतरित कर दिया गया।
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आरटीई एक्ट के तहत तीस छात्र संख्या पर एक टीचर का होना अनिवार्य है। सुषमा कनौजिया शासन के निर्देश पर बनाए गए सोहरामऊ प्राथमिक विद्यालय मॉडल स्कूल में हेड टीचर बनाकर भेजी गईं थी। शासन की ओर से मॉडल स्कूलों में रोक लगाए जाने से उनका स्थानांतरण किया गया है।

जबकि इसी विकासखंड के सेरसा उच्च प्राथमिक विद्यालय में 60 व गौरा कठेरवा उच्च प्राथमिक विद्यालय में 55 छात्र संख्या है। इन दोनों विद्यालयों में दो-दो टीचरों की तैनाती है। सरोसा प्राथमिक विद्यालय में छात्र संख्या 65 है। यहां एक प्रधान टीचर व दो शिक्षामित्रों की तैनाती है।

शिक्षामित्रों के समायोजन प्रक्रिया में होने से यहां एक सहायक टीचर की जरूरत है। फिलहाल प्रधान टीचर पर ही 65 छात्रों की देखरेख का भार है। इसी प्रकार नवाबगंज के गांव पठकापुर उच्च प्राथमिक विद्यालय में 50 छात्र संख्या पर तीन टीचरों की तैनाती है।

वहीं, प्राथमिक विद्यालय मद्दूखेड़ा में 90 छात्र संख्या पर शिक्षामित्र समेत पांच टीचर तैनात हैं। विकासखंड बिछिया में प्राथमिक विद्यालय रायपुर बुजुर्ग में 170 छात्र संख्या पर एक टीचर, कुमेदानखेड़ा प्राथमिक विद्यालय में 60 पर एक टीचर, प्राथमिक विद्यालय खंभार में 57 छात्र संख्या पर एक टीचर व प्राथमिक विद्यालय खूरी में 77 छात्र संख्या पर एक टीचर की तैनाती है।

इन नियुक्तियों को देखकर सहज ही नियुक्ति प्रक्रिया, स्थानांतरण व इनमें व्याप्त खेल समझ में आ जाता है। जानकारों की मानेें तो बेसिक शिक्षा विभाग में यह खेल कोई नया नहीं है। इसके पहले भी समायोजन प्रक्रिया में गड़बड़ियां सामने आ चुकी हैं।

तीस छात्र संख्या पर होना चाहिए एक टीचर
बीएसए के अनुसार शैलेंद्र सिंह को हटाने के बाद भी वहां 45 छात्र संख्या पर दो टीचर पर्याप्त थे। इसके बाद भी सुषमा का स्थानांतरण करना कितना न्यायोचित है जबकि आरटीई एक्ट के तहत तीस छात्र संख्या पर एक टीचर का होना अनिवार्य है।
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