उन्नाव। ‘मलाई’ खाने के लिए पुलिस महकमे में संबद्धीकरण का खेल चल रहा है। पुलिस चौकियों में तैनात सिपाही जुगाड़ की बदौलत मलाईदार चौकियों में डटे हैं।
इसी का नतीजा है कि कम कमाई वाली पुलिस चौकियां सिपाहियों से खाली हैं जबकि हाइवे और मुख्य मार्गों से संपर्कित पुलिस चौकियों में मानक से ज्यादा सिपाहियों की तैनाती है। यह हाल शहर कोतवाली क्षेत्र का है।
शहर कोतवाली क्षेत्र की पुलिस चौकियों में 1 एसआई (इंचार्ज), 1 हेड कांस्टेबल और 8 कांस्टेबल की तैनाती का मानक है। सबसे ज्यादा कमाई वाली पुलिस चौकियों में शुमार होने वाली हाइवे की दही पुलिस चौकी में मौजूदा समय में 19 सिपाही तैनात हैं। इनमें कुछ सिविल लाइंस के तो कुछ कांशीराम और जेल चौकी के हैं। मानक के मुताबिक यहां 11 सिपाही अधिक हैं।
कमाई के मामले में नंबर वन मानी जाने वाली ललऊखेड़ा पुलिस चौकी में कुल 20 सिपाही तैनात हैं इनमें 12 अलग-अलग चौकियों से संबद्ध किए गए हैं। सबसे अधिक भीड़ भाड़ और मुख्य बाजार क्षेत्र में पड़ने वाली सदर पुलिस चौकी की हालत सबसे बदतर है। यहां कोई सिपाही ही नहीं है। सिर्फ एक दरोगा के सहारे पुलिस चौकी चल रही है।
वीआईपी क्षेत्र की सिविल लाइंस पुलिस चौकी में तैनात दरोगा को तीन सिपाहियों से काम चलाना पड़ रहा है। हाल ही में बनी जिला अस्पताल पुलिस चौकी में तत्कालीन एसपी ने 6 सिपाहियों को तैनात किया था मगर सभी ने खुद को हाइवे की चौकियों में संबद्ध करा लिया।
वर्तमान में चौकी इंचार्ज इंदू यादव पर अकेले पूरे क्षेत्र की कानून व्यवस्था कायम रखने की जिम्मेदारी है। कांशीराम पुलिस चौकी में केवल 2 सिपाही, मगरवारा में 5, किला चौकी में 5 और जेल पुलिस चौकी में केवल एक सिपाही तैनात है। हैरानी की बात यह है कि यह हाल ऐसे समय में है जब शहर में चोरी व अन्य अपराध हो रहे हैं। हाल के दिनों में चोर तीन बैंकों तक में धावा बोल चुके हैं।
कराई जाएगी जांच
उन्नाव। अपर पुलिस अधीक्षक रामकिशुन यादव ने बताया कि इसकी जांच कराई जाएगी कि कोतवाली से मनमाने तरीके से संबद्धीकरण क्यों किया गया। संबंधित लोगों से इसका स्पष्टीकरण लिया जाएगा और गड़बड़ी पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी