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हफ्ते भर बाद भी आरबीआई से नहीं आई करेंसी

Sun, 04 Dec 2016 12:30 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, उन्नाव
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एसबीआई के बाहर लगी भीड़ - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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चेस्ट बैंक के शाखा प्रबंधक शनिवार को आरबीआई से करेंसी आने की उम्मीद लगाए बैठे थे। 11 बजे तक करेंसी वैन न आने पर प्रबंधकों ने आरबीआई के अधिकारियों से संपर्क किया तो कोई जवाब नहीं मिला। घड़ी की सुई के साथ ही प्रबंधकों की उम्मीद टूटती जा रही थी। बैंकों में कतार में लगे पेंशनर्स व वेतनभोगियों को भी पांच से दस हजार का भुगतान बैंकों ने किए तो मायूसी ही हाथ लगी। बाबूंगज स्थित सेंट्रल बैंक में कैश न होने के चलते पूरा दिन दो हजार का भी भुगतान नहीं हो सका। कैश की दिक्कत से जूझ रही बैंकों में सुबह से शाम तक किसी भी समय भीड़ की मारामारी नहीं दिखी। एसबीआई, विजया बैंक, इलाहाबाद बैंक, बैंक आफ बड़ौदा, बैंक आफ इंडिया में भीड़ न के बराबर दिखी। पीएनबी मुख्य शाखा में भुगतान के लिए लोगों की भीड़ जरूर देखी गई।
 
आरबीआई दे रहा दर्द
उन्नाव। बैंकों में उमड़ रही भीड़ के आगे जिले को आरबीआई से भेजी गई एक अरब की करेंसी अब लगभग खत्म हो चुकी है। चेस्ट बैंक मैनेजर ने दोबारा दो अरब की डिमांड राशि भेजी, लेकिन 14 दिन बाद भी करेंसी जिले को उपलब्ध नहीं हो सकी है। करेंसी की दिक्कत लोगों को अब रुला रही है। इससे खाताधारक तो परेशान हैं हीं शाखा प्रबंधक भी अछूते नहीं है।
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एटीएम भी दे गए दगा
पाबंदी के बाद छोटे नोट की पर्याप्त करेंसी उपलब्ध करा पाने में बैंक फिसड्डी साबित हुई। 24 हजार का विड्राल तो दूर की बात पंद्रह से बीस हजार के विड्राल का भुगतान करना भी टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। बैंकों में कैश न होेने के साथ ही शहर के अधिकतर एटीएम बूथ शोपीस बने हुए हैं। एटीएम बूथ कैशलेस होने से लोगों को दो हजार रुपये के लिए भी भटकना पड़ रहा है।
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छोटे नोट न होना बन रहा दिक्कतों का कारण
पेट्रोल पंप पर भी पांच सौ का नोट दो दिसंबर की रात 12 बजे से अमान्य हो चुका है। मार्केट में छोटे नोट की दिक्कत के बीच दो हजार की नोट खपाने के लिए लोगों ने पेट्रोल पंप की तरफ रुख किया है। वाहन चालक एक सौ व दो सौ का पेट्रोल या डीजल डलवाते और भुगतान के लिए दो हजार का नोट सर्विस मैन को थमा देते। तो दोनों में कुछ देर के लिए छुट्टे रुपये देने को लेकर बहस होती। अंत में सर्विस मैन को बकाया रुपये वापसी करना ही पड़ता। छोटे नोट की किल्लत पर पेट्रोल पंप संचालकों से बात की गई तो सभी का एक ही रोना था कि छोटे नोट की दिक्कत परेशान कर रही है। किसी तरह से काम चलाया जा रहा है।
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