उन्नाव। केन्द्र सरकार के खाद्य सुरक्षा अधिनियम के खिलाफ व्यापारियों ने मोर्चा खोल दिया। इस कानून को जटिल व अव्यवहारिक बताते हुए व्यापारी नेताओं ने इसे शोषण बढ़ाने वाला कानून बताया।
मंगलवार को मोतीनगर स्थित एक गेस्ट हाऊस में उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के जिलाध्यक्ष रजनीकांत श्रीवास्तव ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहाकि अब नगर पालिका के बजाए सीएमओ आफिस से लाइसेंस मिलेगा। इसके अलावा लाइसेंस फीस भी टर्नओवर के हिसाब से निर्धारित करना भी गलत है। इसे फुटकर व थोक व्यापारी एवं निर्माता के आधार पर होना चाहिए। उन्होंने कहाकि लाइसेंस बनाने की प्रक्रिया को मैनुअल व ऐच्छिक होना चाहिए। रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया इतनी जटिल है उसे पूरा करना असंभव है। जिलाध्यक्ष ने कहा कि व्यापारी थोक व्यापार निर्माता एवं पैकेजिंग का कार्य एक ही परिसर में कर रहे हैं ,उन्हें अलग-अलग लाइसेंस का प्रावधान किया गया है। क्वालिटी रहित खाद्य पदार्थों की बिक्री पर पांच लाख तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। मिस ब्रांडेड होने पर तीन लाख, फूड सेफ्टी आफिसर का आदेश न मानने पर दो लाख, बिना लाइसेंस कार्य करने पर 6 माह की सजा एवं 5 लाख तक का जुर्माना का प्रावधान किया गया है।