उन्नाव। सदर कोतवाली क्षेत्र के रजईखेड़ा गांव में तेरह दिन पहले एक नवजात लावारिस पड़ा मिला था। गांव में ही रहने वाले नरेशपाल ने बच्चे की देखभाल के लिए ले लिया और मर्दनखेड़ा गांव निवासी अपनी बहन सुनीता पत्नी शिवकुमार को दे दिया। समाजसेविका के बच्चे को बेचने का आरोप लगाया तो पति-पत्नी बच्चे को लेकर कोतवाली पहुंचे। वहां पुलिस ने बच्चे को छीनकर बाल कल्याण समिति को सौंप दिया। इस पर सुनीता फफक पड़ी। वह पुलिस से बच्चे को दिलाने की गुहार लगाती रही।
नरेश के मुताबिक शादी के दस साल के बाद भी उसकी बहन औलाद के लिए तरस रही थी। सुनीता ने बताया कि जिस समय बच्चा उसे मिला था ठंड लग जाने से उसकी हालत काफी खराब थी। बदन पर कीड़ों के काटने के निशान और पैर में छाले भी थे। काफी इलाज कराया तब जाकर बच्चा ठीक हुआ। इसी दौरान एक समाज सेविका ने नरेशपाल पर बच्चे को 50 हजार रुपये में बेच देने का आरोप लगाते हुए कोतवाली में शिकायत कर दी। मंगलवार को कोतवाली एसएसआई आरके सिंह ने मर्दनखेड़ा गांव से बच्चे को बरामद कर लिया। मंगलवार को सुनीता अपने पति शिवकुमार के साथ नवजात को लेकर कोतवाली आई। कोतवाली में बच्चे उससे छीनकर बाल कल्याण समिति को सौंपे जाने की जानकारी होते ही सुनीता फफक पड़ी। पुलिस ने उसे समिति के समक्ष पेश करने की कवायद शुरू की मगर कागजी प्रक्रिया पूरी न होने से कार्रवाई नहीं हो पाई। सुनीता पुलिस से बच्चे को किसी तरह उसे दिलाने की गुहार लगाती रही। एसआई आरके सिंह ने बाल कल्याण समिति के माध्यम से गोद लेने की प्रक्रिया पूरी करने की सलाह दी।