उन्नाव। शिमला मिर्च, पत्ता गोभी व टमाटर की खेती को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय कृषि योजना के तहत किसानों को 20 हजार रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से अनुदान दिया जाएगा। पहले आओ, पहले पावो के आधार पर योजना का लाभ किसानों को दिया जाएगा। योजना की जानकारी किसानों तक पहुंचाने के लिए बड़े पैमाने पर प्रचार-प्रसार की तैयारी भी की जा रही है।
आम आदमी की पहुंच से दूर हो रही सब्जियों को थाली में पहुंचाने के लिए सरकार ने राष्टृीय कृषि विकास योजना के तहत लघु सीमांत किसानों को शिमला मिर्च, टमाटर और पत्ता गोभी की खेती को बढ़ावा देने के लिए अनुदान की घोषणा की है। इसके तहत एक एकड़ क्षेत्र में इन फसलों को बोने वाले किसानों को बीस हजार रुपये अनुदान के रूप मे मिलेंगे। इस योजना में सड़क मार्ग व सिंचाई के साधन रखने वाले किसानों को वरीयता दी जायेगी। एक किसान के पास कम से कम 16 विसुवा खेती होनी चाहिए। अनुदान की यह रकम बीज, खाद्य व दवा के रूप में मिलेगी। यानि किसान उपरोक्त चीजों की खरीद अनुदान की धनराशि से ही कर सकेगा। किसान ने अनुदान लेने के बाद फसल बोई है कि नहीं इसकी जांच के लिए भी कृषि अधिकारियों को लगाया गया है। जनपद में शिमला मिर्च और टमाटर की खेती के लिए लक्ष्य 10 हेक्टेयर व पत्ता गोभी का लक्ष्य 7 हेक्टेयर रखा गया है। यानि इतने क्षेत्रों में कम से कम इस वर्ष इन फसलों की खेती कराई जाएगी। योजना की जानकारी किसानों तक पहुंचाने के लिए कृषि अधिकारियों को गांव-गांव जाकर इसका प्रचार-प्रसार करने के लिए कहा गया है। इसके अलावा बीज भंडार के माध्यम से भी इसकी जानकारी देने की तैयारी है।
कैसे करे आवेदन
इस योजना का लाभ लेने वाले किसान उद्यान विभाग जाएं और अपने साथ इन्तखाब, फोटो व शपथ पत्र जरूर रखें। विभाग में तय फार्मेट में किसानों से एक फार्म भरवाया जाएगा। जिसके साथ शपथ पत्र लगेगा। जिसमें जिक्र होगा कि वह अपने खेतों में इन फसलों की खेती करेगा।
यह योजना शिमला मिर्च, टमाटर व पत्ता गोभी को बढ़ावा देने के लिए है। लघु सीमांत किसानों को इससे सबसे ज्यादा फायदा मिलेगा। जो किसान इसका लाभ लेना चाहते हैं वह जल्द आवेदन करें। पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर किसानों को इसका लाभ दिया जाएगा।
आरबी वर्मा, अपर उद्यान अधिकारी, उन्नाव
65 लाख से बनेगा कंप्यूटर ट्रेनिंग सेंटर
उन्नाव। अल्पसंख्यक छात्र-छात्राओं के लिए डीईओ की ओर से आईटीआई कैंपस में एक भवन का निर्माण कराने की तैयारी की जा रही है। इसमें डोएक सीसीसी, एनएसडीसी व एसडीआई के तहत ट्रेनिंग दी जाएगी। इसके लिए जिलाधिकारी से संस्तुति के बाद प्रस्ताव को मंजूरी के लिए शासन को भेज दिया गया है।
जिला सेवायोजन कार्यालय की ओर से जिले के अल्पसंख्यक छात्र-छात्राओं को कंप्यूटर की विस्तृत जानकारी देने के लिए खाका तैयार किया गया है। इसमें आईटीआई कैंपस में बनी पुरानी जर्जर इमारत को चिह्नित कर आठ कमरों का एक भवन बनवाने का प्रस्ताव रखा गया है। इस भवन के अलावा 50 कंप्यूटर सिस्टम व फर्नीचर आदि में होने वाले 65 लाख रुपये के खर्च का प्रस्ताव जिलाधिकारी को भेजा गया था जिसे वहां से संस्तुति मिलने के बाद उप्र शासन को भेज दिया गया है। जिला सेवायोजन अधिकारी मिथिलेश कुमार ने कहा कि भवन, कंप्यूटर व फर्नीचर आदि में होने वाले खर्च की अनुमानित लागत 65 लाख रुपये है। इसे डीएम की संस्तुति के बाद शासन को भेज दिया है। जैसे ही शासन की ओर से बजट मिलता है इस जर्जर भवन को तुड़वाकर दोबारा बनवाया जाएगा। इसमें आठ कमरे तैयार करवाए जाएंगे और अल्पसंख्यक छात्र-छात्राओं को कंप्यूटर का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
आठवीं पास के बाद मिलेगी कंप्यूटर ट्रेनिंग
मल्टी सेक्टोरल डेवलपमेंट प्रोजक्ट (एमएसडीपी) के तहत कम पढ़े लिखे अल्पसंख्यक छात्र-छात्राओं को भी कंप्यूटर की उच्चस्तरीय शिक्षा प्रदान की जाएगी। इसमें कम से कम कक्षा आठ पास के छात्रों को एडमिशन दिया जाएगा और उन्हें कंप्यूटर का प्रशिक्षण दिया जाएगा। जिला सेवायोजन अधिकारी ने बताया कि मल्टी सेक्टोरल डेवलपमेंट प्रोजक्ट (एमएसडीपी) के तहत अल्पसंख्यक छात्र-छात्राओं को डोएक ट्रिपल सी, नेशनल स्किल डेवलपमेंट कोर्स (एनएसडीसी) व स्किल डेवलपमेंट इनीसिएटिव (एसडीआई) के तहत कंप्यूटर प्रशिक्षण दिया जाएगा।