उन्नाव। साकेत धाम में चल रही रामलीला में पुष्पवाटिका, धनुष यज्ञ, लक्ष्मण परशुराम संवाद का मंचन हुआ। वही वकील संघ की रामलीला में राम कलेवा, दशरथ प्रतिज्ञा, राम वनवास और भरत मिलाप का मंचन देखकर रामलीला देख रहे दर्शकों की आंखों में आंसू आ गए।
साकेत धाम में चल रामलीला में सीता जी स्वयंवर से पूर्व पुष्पवाटिका में सखियों को लेकर फूल तोड़ने के लिए जाती हैं। वही पर राम और लक्ष्मण पुष्पवाटिका फूलों को देख रहे होते। फूल को देखते दोनों की नजरें एक दूसरे पर पड़ती हैं। सीता जी के साथ रही सखियां राम लक्ष्मण की सुंदरता की प्रशंसा करती हैं। राजा जनक अपनी पुत्री के विवाह को लेकर स्वयंवर का आयोजन करते हैं इसमें देश के कोने- कोने से राजाओं को बुलाया जाता है। स्वयंवर में कोई भी राजा धनुष की प्रत्यंचा नहीं चढ़ा पाया तो राजा जनक विलाप करने लगे। यह देखकर विश्वामित्र ने राम को धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाने के लिए कहा। जैसे ही राम धनुष की प्रत्यंचा चढ़ाने लगे धनुष टूट गया। धनुष टूटने की आवाज सुनकर परशुराम वहां पहुंचे और राम द्वारा धनुष तोड़ने पर उन पर क्रोधित हुए। यह देखकर लक्ष्मण को क्रोध आ गया और परशुराम व लक्ष्मण में विवाद होने लगता। राम के हस्तक्षेप पर लक्ष्मण शांत हो जाते हैं।
उधर, वकील संघ की रामलीला में राम कलेवा में राजा जनक ने राम को बहुत से दास, दासियों सहित बहुत सारा उपहार भेंट किया। राम, लक्ष्मण और सीता अयोध्या आ जाते है और इसके साथ दशरथ प्रतिज्ञा का मंचन होता है। कैकेयी द्वारा राजा दशरथ से तीन वचनों मे एक के रुप में राम को वनवास को कहती है तो राजा दशरथ ने कहा यह छोड़ कोई अन्य वचन मांग लो परन्तु कैकेयी टस से मस नही हुई। इस बात की जैसे ही राम को जानकारी होती है तो राम वन जाने की तैयार हो जाते है। राम के साथ लक्ष्मण व सीता भी वन जाते है। इसकी जानकारी भरत को होती है वह उनके मिलने के लिए वन को जाते है। काफी दिनों तक जंगल में खोजने के बाद जब राम से भरत मिलने है इस दृष्य का मंचन रामलीला कलाकारों द्वारा ऐसा किया गया था जिसको देखकर रामलीला देखकर रहे दर्शकों की आंखों में आंसू बहने लगे। इसमें प्रमुख रुप से सरदार गुरुवीर सिंह, राकेश सिंह, सोहनलाल आर्या, कन्हैया अवस्थी, सुरेश मिश्रा, केदार नाथ गुप्ता, नवीन चौरसिया, कांती मोहन गुप्ता आदि रहे।