सफीपुर। भगवान शंकर के मंदिर पर लगे शिखर त्रिशूल को उतारने वाले मंदिर के कर्ताधर्ता को उसके दो साथियों के साथ पुलिस ने पकड़ लिया। बताया जाता है कि पहले से नियत खराब किए आरोपी ने एक माह पूर्व लखनऊ से लोगों को बुलाकर त्रिशूल की कीमत लगवाई थी।
कोतवाली क्षेत्र के ग्राम जमालनगर में स्थिति शिवमंदिर के मुख्य कर्ताधर्ता संतोष सिंह लखनऊ में रहकर व्यवसाय करते हैं। इनकी अनुपस्थिति का लाभ उठाकर उनका भांजा नानक सिंह निवासी ग्राम माझिला जनपद हरदोई जमालनगर यहां रहने लगा और मंदिर के कार्यों मेें हस्तक्षेप करने लगा। सन् 1988 में बिजली गिरने से मंदिर क्षतिग्रस्त हो गया था। साथ ही चर्चा हो गई थी कि मंदिर के ऊपर लगा त्रिशूल कीमती धातु में बदल गया है। आरोपी नानक सिंह ने एक माह पूर्व लखनऊ से आए उसके साथियों ने त्रिशूल की करोड़ों रुपये में आंकी थी। तभी से त्रिशूल को निकलवाने की फिराक लगे आरोपी ने मंदिर के जीर्णोद्धार की योजना बना सहयोगी राजेंद्र निवासी ग्राम बेहटा व जवाहर सिंह निवासी ग्राम जमालनगर के साथ शिखर त्रिशूल उतार अपने नाना महादेव के घर भूसे में छिपा दिया और मंदिर के ऊपर पीतल का त्रिशूल लगवा दिया। गांव वालों को शंका हुई तो लोगों ने कोतवाली पुलिस को सूचना दे दी। गांव पहुंची पुलिस ने एक व्यक्ति के घर में छिपे नानक सिंह और उसके सहयोगियों को हिरासत में ले लिया। आरोपियों की निशानदेही पर भूसे मेें छिपाकर रखे गए मंदिर के त्रिशूल सहित मंदिर का एक गिलास और दो नाली लाइसेंसी बंदूक बरामद की गई। कोतवाली पुलिस को ग्रामीणों ने तहरीर देकर आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग की। प्रभारी निरीक्षक श्रीनारायण त्रिपाठी ने कार्रवाई का आश्वासन दिया।