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बोरा-टाट में आसमान के नीचे संवर रहा भविष्य

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असोहा। सर्व शिक्षा अभियान की जमीनी हकीकत एकदम उलट है। असोहा विकासखंड के गांव भूखनखेड़ा, सेरसाखेड़ा व खत्रिनखेड़ा गांवों के प्राथमिक विद्यालय बोरा-टाट में बच्चों को बैठाकर आसमान के नीचे शिक्षा दी जा रही है।
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भूखनखेड़ा में विद्यालयों में छत नहीं पड़ पाई है। सन् 2011 से विद्यालयों का निर्माण कार्य चल रहा है लेकिन इन्हें आज तक पूरा नहीं किया जा सका। जबकि इन विद्यालयों में अध्यापकों की तैनाती करके बच्चों का प्रवेश भी ले लिया गया है। बच्चे प्लास्टिक की बोरी पर बैठकर पेड़ के नीचे पढ़ाई करने को मजबूर हैं। बारिश होने पर पढ़ाई बाधित हो जाती है। मिड-डे मिल भी बच्चों को नहीं मिल पा रहा है। यहां के इंचार्ज टीचर रामनरेश ने बताया कि छात्र-छात्राओं को बाहर बैठाकर पढ़ाना पड़ रहा है। सेरसहा खेड़ा प्राथमिक विद्यालय का भी यही हाल है। यहां भी भवन का निर्माण कार्य पूरा नहीं हो पाया है। इसलिए यहां भी छात्र-छात्राएं बाहर बैठकर ही पढ़ाई कर रहे हैं। मिड-डे मील बनने की व्यवस्था न होने के कारण बच्चों को मध्याह्न भोजन नहीं उपलब्ध हो पा रहा है।
ग्राम सभा चेतरा के मजरे खत्रिनखेड़ा में दो वर्ष पहले साल लाख रुपये की लागत से बना प्राथमिक विद्यालय जर्जर हो चुका है। बरसात में छत से पानी टपकता है साथ ही बरामदे की बीम चटक गई है। इस विद्यालय का निर्माण प्राथमिक विद्यालय के टीचर संतोषी नंदन शुक्ला ने वर्ष 2012 में कराया था। विद्यालय की छत दो सालों में ही टपकने लगी। पानी टपकने से कार्यालय में बैठने तक की जगह नहीं है। विद्यालय में रसोईघर का निर्माण अधूरा होने से मिड-डे मिल बाहर खुले में बनाया जा रहा है। शौचालय में दरवाजे न होने से छात्राओं व अध्यापिकाओं को खासी परेशानी उठानी पड़ रही है। विद्यालय परिसर में स्थित सीवर टैंक भी खुला पड़ा है। जो हादसे को दावत दे रहा है। 50 छात्र संख्या वाले इस विद्यालय की प्रधान टीचर शिल्पी सिंह का कहना है कि एक कमरे में काफी दिनों से ताला लटक रहा है। उसकी चाभी उन्हें नहीं मिली। जानकारी करने पर पता चला कि विद्यालय निर्माण में लगा मिस्त्री भुगतान न मिलने पर कमरे की चाबी साथ ही लेकर चला गया।
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इसी तरह सेरसहा खेड़ा प्राथमिक विद्यालय का निर्माण भी अधूरा पड़ा है। निर्माणधीन विद्यालय में छत व प्लास्टर तो हो गया लेकिन दरवाजे अभी तक नहीं लगे हैं। पुताई का काम भी होना है। इसके बाद भी शिक्षा विभाग ने बच्चों का विद्यालय में प्रवेश लेकर पढ़ाई शुरू करा दी। प्रधान टीचर राजेश यादव ने बताया कि विद्यालय में 24 बच्चे हैं और उन्हें अभी ड्रेस मिलनी है। विद्यालय का निर्माण कार्य कराया जा रहा है।

बोले जिम्मेदार
1-बीएसए डॉ. मुकेश कुमार सिंह ने बताया कि मामला हमारी जानकारी में है। निर्माण कराने में बजट का अभाव बताया गया है। जांच की जा रही है। यदि बजट के चलते निर्माण कार्य रुका है तो उसकी व्यवस्था कराई जाएगी। लेकिन यदि लापरवाही है तो उसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

2-विद्यालय निर्माण प्रभारी संतोषी नंदन शुक्ला का कहना है कि बजट के कारण निर्माण कार्य पूरा नहीं हो पाया है। बजट की मांग की गई है। जल्द ही निर्माण कार्य पूरा करा दिया जाएगा।
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