उन्नाव। साहित्य भारती के 20वें कवि सम्मेलन में वाणी पुत्रों का सम्मान किया गया। इस दौरान अरुणिमा स्मारिका का विमोचन भी हुआ। भोर तक कविताओं का दौर चलता रहा और श्रोता वाह-वाह करते रहे। कई जिलों से आए कवियों ने अपनी रचनाओं से लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
समारोह का शुभारंभ मुख्य अतिथि वरिष्ठ आईएएस अधिकारी लक्ष्मीकांत शुक्ल और विशिष्ट अतिथि सीडीओ हेमंत कुमार द्विवेदी ने मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण व दीप प्रज्ज्वलन कर किया। अलीगढ़ से आईं मुमताज नसीम ने पढ़ा-आज इकरार कर लिया हमनें, खुद को बीमार कर लिया हमने..। इलाहाबाद की सुनैना त्रिपाठी ने पढ़ा-आत्मा बनके तन में समा जाओ ना, और पास आओ, पास आओ..। आजमगढ़ के सीडीओ डा. अखिलेश मिश्रा ने कहा-रोटी खरीद है इमान बेेंचकर, घर में बचा था बस यही सामान बेंचकर..। लोकेश शुक्ल ने वो शोलों से करने चले हैं उजाले, किया है जिन्हें देश हमने हवाले पढ़ा तो लोगों ने उत्साह बढ़ाया। डा. कमल मुसद्दी ने पढ़ा-राजधानी की सड़कों पर बर्बर घिनौनाकांड, तिस पर बयानबाजी की जुगाली करते नेता फायर ब्रांड और डॉ. हरिओम पवार ने पढ़ा-मैं भारत का संविधान हूं, लाल किला से बोल रहा हूं, मेरा अंतरमन घायल है, दिल की गांठे खोल रहा हूं ।
इसके अलावा रामकिशोर तिवारी किशोर बाराबंकी, मृदुल तिवारी, हास्य कवि दिलीप दुबे, डा. सुरेश अवस्थी कानपुर, कीर्ति माथुर अलीगढ़, केडी शर्मा हाहाकारी, सरदार मंजीत सिंह आदि ने भी कविता पाठ किया। अंत में डा. हरिओम पवार को साहित्य भारती अलंकरण और केडी शर्मा हाहाकारी को बलई काका सम्मान दिया गया। यहां पर अतुल मिश्रा, रवि सहाय मिश्र राधे, ललित मिश्रा, दिनेश तिवारी, हरिमोहन निगम, नेहा निगम, तबस्सुम नफीस, रामदेव शुक्ला, पीके मिश्रा, अंकित शुक्ला आदि मौजूद रहे।