शराब की दुकानों को हाईवे से 500 मीटर दूर हटाने का सुप्रीम कोर्ट का आदेश न मानने पर आबकारी विभाग ने 88 दुकानों को सील कर दिया। हालांकि मामले की सुनवाई में राहत देते हुए कोर्ट ने 20 हजार से कम आबादी वाले नगरीय क्षेत्रों में दुकानों की दूरी में संशोधन करते हुए 220 मीटर तय की है।
अब प्रशासनिक अधिकारी इस मथापच्ची में जुटे हैं कि किस क्षेत्र की कौन सी दुकान को कितनी दूर किया जाए। कौन सा मार्ग राज्यमार्ग में शामिल किया जाए और किस बाईपास को नेशनल हाईवे माना जाए। शनिवार को आबकारी, पीडब्ल्यूडी और एनएचएआई के अधिकारी इसी माथापच्ची में जुटे रहे। फिलहाल तब तक आबकारी विभाग ने परिधि की सभी दुकानों को बंद करा दिया है।
मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल और स्टेट हाईवे के किनारे स्थित सभी तरह की शराब की दुकानों को हाईवे से कम से कम पांच सौ मीटर दूर करने का आदेश दिया था। आबकारी विभाग और दुकानदार 29 मार्च तक आदेश में संशोधन की उम्मीद लगाए रहे। मगर कोर्ट ने सिर्फ इतनी राहत दी कि जिन नगरीय क्षेत्रों की आबादी बीस हजार से कम है वहां दुकानें हाईवे से 220 मीटर दूर की जाएं। फिलहाल जिला आबकारी अधिकारी एसके दुबे ने उन सभी 171 दुकानों को बंद करा दिया है, जिन्हें पूर्व में चिह्नित किया गया था। इनमें 83 लाइसेंस धारकों ने स्थान परिवर्तन की प्रक्रिया पूरी कर ली है।
जबकि 88 दुकानदार अभी नई दुकान नहीं खोज पाए हैं। कोर्ट की ओर से मिली राहत के बाद अपर मुख्य सचिव की ओर से शुक्रवार को जारी किए गए एक पत्र ने आबकारी विभाग की मुश्किलें बढ़ गई हैं। उन्होंने शहर के भीतर के मार्गों को ओडीआर (अन्य जिला मार्ग) की श्रेणी में रखने और राज्य मार्गों के बाईपास को नेशनल हाईवे की श्रेणी में रखने के आदेश दिए हैं।
शनिवार को जिला आबकारी अधिकारी ने पीडब्ल्यूडी और एनएचएआई के अधिकारियों के साथ कई घंटे बैठक की। जिला आबकारी अधिकारी ने बताया कि नए सिरे से सर्वे कराया जा रहा है। फिलहाल पूर्व के चिह्नित 171 दुकानों में से जो 88 दुकानें शिफ्ट नहीं की है, उन्हें सील कर दिया गया है।