उन्नाव। शहर में पॉलिथीन पर प्रतिबंध के आदेश का पालन नहीं हो रहा है। बाजार में खुलेआम प्रतिबंधित पॉलिथीन व प्लास्टिक से बने उत्पादों की बिक्री और प्रयोग किया जा रहा है। शासन के कड़े निर्देश के बाद भी अधिकारी पॉलिथीन पर रोक नहीं कर रहे हैं।
पॉलिथीन से पर्यावरण को हो रहे नुकसान को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इस पर प्रतिबंध लगा दिया था। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर प्रदेश सरकार ने 15 जुलाई से पॉलिथीन व दो अक्तूबर से प्लास्टिक से बने उत्पादों पर प्रतिबंध के आदेश को लागू किया था।
निकाय के अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई थी कि वह आदेश का कड़ाई से अनुपालन कराएं। हालांकि अधिकारियों की अनदेखी की वजह से इस पर प्रतिबंध नहीं लग सका। अभियान चलाकर प्रशासनिक अधिकारियों ने कोरम जरूर पूरा किया। ऐसे में पॉलिथीन के उत्पादन व प्रयोग पर रोक नहीं लग सकी।
रोज खपाई जा रही तीन क्विंटल पॉलिथीन
पॉलिथीन पर प्रतिबंध प्रतिबंध से पहले जहां पांच क्विंटल से अधिक पॉलिथीन की बिक्री रेाज हो रही थी, वहीं मौजूदा समय में भी तीन क्विंटल तक पॉलिथीन शहर में खपाई जा रही है। शहर के कचौड़ी गली, धवन रोड व बस स्टैंड के पास पॉलिथीन की बिक्री होती है। वहीं थोक कारोबारी खुद ही दुकानों में पॉलिथीन की सप्लाई कराते हैं।
जल्द चलेगा अभियान
नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी रामपूजन श्रीवास्तव ने बताया बिक्री पर लगाम लगाने के लिए अभियान चलाया जाता है। पॉलिथीन का प्रयोग लोग न करें इसके लिए जागरुकता अभियान भी चलाया जा रहा है। जल्द ही चेकिंग अभियान चलाया जाएगा।
दस लाख साल में नष्ट होती है पॉलिथीन
प्रदूषण विभाग के अधिकारी विकास मिश्रा ने बताया कागज और फल, सब्जियां जैविक प्रक्रिया के माध्यम से एक माह के अंदर मिट्टी में मिल जाती हैं। वहीं पॉलिथीन को इसी प्रक्रिया से मिट्टी में मिलने में दस लाख वर्ष तक का समय लगता है। वहीं प्लास्टिक के जलने या उसके जमीन में दबे होने पर इससे जहरीली गैस निकलती है जो मनुष्य, पेड़ों और पूरे पर्यावरण के लिए हानिकारक है।
प्रतिबंध के आदेश का पानी कराने में प्रशासन गंभीर नहीं, धड़ल्ले से हो रहा प्रतिबंधित पॉलिथीन का प्रयोग
अमर उजाला ब्यूरो