उन्नाव। सदर कोतवाली के हुसैननगर में चार दिन पूर्व हुए सड़क हादसे में घायल युवक की शिनाख्त कराने में पुलिस ने लापरवाही बरती। उपचार के दौरान जिला अस्पताल में युवक ने दम तोड़ दिया। पहचान न होने से शव दो दिन तक मुर्दाघर में रखा रहा। गुरुवार रात परिजनों ने युवक की पहचान की। पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाया है।
माखी थानाक्षेत्र के भदेसा गांव निवासी राजू यादव (30) पुत्र रामभजन शहर के पीडी नगर निवासी गुड्डू की कार चलाता था। दो दिसंबर की सुबह वह गुड्डू की बाइक की सर्विस कराने के लिए घर से निकला था। देर शाम जब वह घर लौट रहा था तब सदर कोतवाली के हुसैननगर के निकट वह एक राहगीर को बचाने के चक्कर में खंती में गिरकर घायल हो गया था। पहचान न होने से ललऊखेड़ा चौकी इंचार्ज जितेंद्र कुमार ने राजू को अज्ञात में अस्पताल में भर्ती करा दिया था। उसकी बाइक पुलिस चौकी में खड़ी करा दी।
दो दिन इलाज के बाद राजू की जिला अस्पताल में मौत हो गई थी। पहचान न होने से पुलिस ने शव को मुर्दाघर में रखवा दिया था। अस्पताल के एक कर्मी ने परिजनों को सूचना दी। गुरुवार शाम परिजन पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे। राजू के भाई मोनू का आरोप है कि पुलिस बाइक के नंबर के आधार पर पता लगाती तो बाइक के मालिक गुड्डू का पता लगा लेती और राजू की मौत से पहले ही सूचना मिल जाती। शुक्रवार को पोस्टमार्टम के बाद परिजन शव लेकर घर चले गए।
कानपुर के नंबर की थी बाइक
ललऊखेड़ा चौकी इंचार्ज जितेंद्र यादव ने बताया कि जिस बाइक से हादसा हुआ था वह कानपुर एआरटीओ में पंजीकृत है। एप की मदद से गाड़ी मालिक की पहचान करने की कोशिश की गई थी। वह कानपुर एआरटीओ भी गए लेकिन सर्वर न आने से गाड़ी मालिक का पता नहीं मिल सका था।
-दो दिसंबर को सड़क हादसे में घायल युवक की बुधवार रात हुई थी मौत
-युवक के पास मिली थी बाइक, परिजनों का आरोप, शिनाख्त कराने का नहीं किया प्रयास