सदर, सफीपुर और बांगरमऊ में उन्होंने अपने पसंदीदा प्रत्याशी उतारें हैं, जबकि मोहान और पुरवा सीट पर पिता मुलायम सिंह की बात रख ली है। भगवंतनगर सीट के कांग्रेस के खाते में जाने के संकेत मिल रहे हैं। इस सीट से कांग्रेस युवक कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अंकित सिंह परिहार को उतारने की तैयारी में है। कांग्रेस ने इस सीट को अपने खाते में लाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा दिया है।
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उन्नाव सदर से मनीषा मैदान में
सपा ने उन्नाव सदर विधानसभा सीट से मनीषा दीपक को प्रत्याशी बनाया है। मनीषा दीपक पर अपने ससुर और पति की राजनीतिक विरासत बचाए रखने की चुनौती है। मनीषा दीपक के ससुर दिवंगत मनोहर लाल सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव के खास लोगों में शुमार किए जाते थे। वह कई बार मंत्री भी रहे। मनोहर लाल के बाद उनकी राजनीतिक विरासत उनके बेटे दिवंगत दीपक कुमार ने संभाली थी। दीपक कुमार उन्नाव सदर से चुनाव लड़ते रहे। एकबार वह सांसद भी रहे थे। दीपक कुमार 2012 के चुनाव में सदर से फिर विधायक बने, लेकिन 2013 में उनके निधन से रिक्त हुई सीट पर 2014 में लोकसभा चुनाव के साथ ही हुए विधानसभा के उपचुनाव में सपा ने दीपक कुमार की पत्नी मनीषा दीपक को प्रत्याशी बनाया था। लेकिन मोदी लहर में मनीषा को हार का सामना करना पड़ा था।
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सफीपुर से सुधीर को तीसरी बार मौका
सपा ने सफीपुर (सुरक्षित) सीट से सिटिंग विधायक व स्वास्थ्य राज्यमंत्री सुधीर रावत पर लगातार तीसरी बार भरोसा जताया है। शिक्षक रहे सुधीर रावत ने 2007 में पहली बार सपा के टिकट पर विधानसभा का चुनाव लड़ा और अपने प्रतिद्वंद्वी बसपा प्रत्याशी मनीष कुरील को हराया था। 2007 के चुनाव में विधायक बनने वाले वह सबसे कम उम्र के विधायक थे। वह जब पहली बार विधायक बने तो उनकी उम्र 34 वर्ष थी। 2012 में सपा ने उन्हें फिर प्रत्याशी बनाया जिसमें वह दोबारा विधायक बने। रावत को सीएम अखिलेश यादव से नजदीकी का फायदा मिला और 2015 में स्वास्थ्य राज्यमंत्री बनाया। 2017 के चुनाव के लिए भी सपा ने उन्हें मैदान में उतारा है।
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बांगरमऊ से बदलू खां को मौका
बांगरमऊ सीट से सपा ने सिटिंग विधायक बदलू खां को फिर प्रत्याशी घोषित कर दिया है। बदलू खां का नाम पूर्व में मुलायम सिंह और सीएम अखिलेश यादव की ओर से जारी की सूची में भीथा। पिछले दिनों समाजवादी परिवार में हुए दंगल में प्रत्याशी बदलने की चर्चाएं काफी तेज रहीं। लेकिन शुक्रवार को प्रत्याशी बनाकर सीएम ने अटकलों पर विराम लगा दिया है। बदलू खां ने 2012 में पहली बार बांगरमऊ से सपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था और बसपा प्रत्याशी को हराकर विधायक बने थे। बदलू खां राजनीति में आने से पहले राजस्व विभाग में लेखपाल के पद पर रहे। राजनीति के लिए 1995 में नौकरी छोड़ी 2002 में संडीला से दावेदारी की थी, लेकिन टिकट नहीं मिला था। 2012 में सपा ने उन पर भरोसा जताया और वह विधायक बने। 2017 के चुनाव में भी पार्टी ने उन्हें चुनाव मैदान में उतरने का मौका दिया है।
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मोहान से सेवकलाल को मौका
मोहान (सुरक्षित) सीट से प्रत्याशी घोषित किए गए सेवक लाल रावत को मुलायम सिंह यादव और तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव से नजदीकी का फायदा मिला। मुलायम सिंह ने उन्हें मोहान से प्रत्याशी घोषित कर दिया था। पार्टी में घमासान मचने के बाद माना जा रहा था कि सीएम अपनी लिस्ट में उनका पत्ता साफ कर सकते हैं। लेकिन उन्होंने ने यहां भी अपने पिता का मान रखा और सेवक लाल रावत को प्रत्याशी बनाया है। सेवक लाल रावत 2011 में कस्टम से अप्रेजर पद से रिटायर हुए थे। उनका राजनीतिक इतिहास खास पुराना नहीं है। पिछले पंचायत चुनाव में सेवकलाल ने सक्रिय राजनीति में कदम रखा और पत्नी सोना रावत को ब्लाक प्रमुख बनाया।
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पुरवा में उदयराज पांचवीं बार मैदान में
सपा में मचे घमासान में मुलायम सिंह के पाले में रहे पुरवा विधायक उदयराज का नाम शुक्रवार सुबह जारी हुई लिस्ट में शामिल न होना सियासी गलियारे में चर्चा का विषय बन गया। हालांकि शाम होते-होते सपा ने उनके नाम की घोषणा कर दी तो सारी अटकलों पर विराम लग गया। उदयराज यादव पुरवा से लगातार चार बार से चुनाव जीत रहे हैं। 2017 के चुनाव में वह पांचवीं बार सपा के प्रत्याशी बने हैं। इस चुनाव में भी जीत हासिल कर वह हैट्रिक लगा पाते हैं या नहीं यह तो चुनाव नतीजे आने के बाद ही साफ हो पाएगा। उदयराज यादव पहली बार 1996 में सपा के टिकट पर पुरवा से विधायक बने। सक्रिय राजनीति में आने से पहले वह लखनऊ में छात्र राजनीति में सक्रिय रहे और वहीं से वह सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव के संपर्क में आए।