फोटो नंबर-1-गोसाईंखेड़ा स्थित स्टेडियम का कार्यालय भवन। संवाद
फोटो नंबर-2-घास और झाड़ियों से पटा स्टेडियम का मैदान। संवाद
-सुरक्षा में तैनात पीआरडी जवानों पर हर महीने खर्च हो रहे 45 हजार
-प्रशिक्षक न होने से क्षेत्रीय युवाओं और छात्रों को नहीं मिल रहा लाभ
संवाद न्यूज एजेंसी
उन्नाव (असोहा)। खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए गोसाईं खेड़ा में 18 लाख से बने स्टेडियम की मरम्मत पर लागत से दो गुना यानी 36 लाख रुपये खर्च हो गए लेकिन प्रशिक्षक न होने से यह काम नहीं आया।
युवा कल्याण और खेल विभाग की अनदेखी से मैदान, जंगल में तब्दील है। इंडोर खेलों के लिए बने बैडमिंटन हॉल के टाइल्स और प्लास्टर फिर उखड़ने लगे हैं। खास बात यह है कि स्टेडियम की सुरक्षा पर भी हर महीने 45 हजार रुपये खर्च हो रहे हैं।
खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए वर्ष 2006 में असोहा के गोसाईंखेड़ा में स्टेडियम का निर्माण कराया गया था। पांच साल में ही स्टेडियम का बाउंड्रीवाल टूट गई, बैडमिंटन हाल का टिनशेड उखाड़ गया और मैदान जंगल में तब्दील हो गया। एक साल पहले इस स्टेडियम की मरम्मत पर निर्माण लागत से दो गुना रकम खर्च कर दी गई।
36 लाख रुपये से बैडमिंटन हॉल और बाउंड्रीवॉल की मरम्मत और सुंदरीकरण का काम कराया गया। युवाओं को एक बार फिर उम्मीद दिखी लेकिन धूमिल हो गई। इस स्टेडियम में किसी भी खेल के प्रशिक्षक की तैनाती नहीं हो पाई है।
स्टेडियम की सुरक्षा के लिए प्रतिदिन आठ-आठ घंटे के लिए तीन पीआरडी जवानों की तैनाती की गई है। एक पीआरडी जवान को प्रतिदिन 500 रुपये मानदेय दिया जाता है। इस हिसाब से हर दिन 1500 रुपये और हर महीने 45 हजार रुपये सुरक्षा पर खर्च हो रहे हैं।
गोसाईंखेड़ा स्टेडियम, राजकीय महाविद्यालय से सटा हुआ है। इस महाविद्यालय में 70 छात्र-छात्राएं लेकिन खेल शिक्षक न होने से छात्रों की खेल गतिविधियां नहीं हो पातीं। स्टेडियम में कोच की तैनाती हो तो महाविद्यालय के छात्रों को भी इसका लाभ मिलेगा।
कोच न खिलाड़ी, उपकरण खरीदने के लिए 94 लाख मिले
जिले के छह ब्लॉक स्तरीय स्टेडियम में न कोच हैं और न खिलाड़ी लेकिन खेल उपकरण खरीदने के लिए युवा कल्याण विभाग को 94 लाख रुपये मिले हैं। इन रुपयों से चार स्टेडियम के लिए (बचुआखेड़ा और शुक्लागंज को छोड़कर) खेल उपकरण खरीदे जाएंगे। विभाग ने इसकी तैयारी भी शुरू कर दी है
वर्जन
जिम्मेदार बोले
जिले में केवल एक व्यायाम प्रशिक्षक की नियुक्ति है। सभी छह स्टेडियम में संविदा पर कोच तैनात करने की प्रक्रिया चल रही है। कोच तैनात करने की स्वीकृति हो गई है, लेकिन मानदेय तय न होने से प्रक्रिया रुकी है। उम्मीद है कि अगले एक-दो महीने में कोच तैनात करने का रास्ता साफ हो जाएगा। अनिल कुमार तिवारी, युवा कल्याण अधिकारी
स्टेडियम कभी काम नहीं आया
फोटो-3-अनुज शुक्ला
सेमरी निवासी अनुज शुक्ला ने बताया कि स्टेडियम बनने से क्षेत्र के युवाओं को विभिन्न खेलों में प्रतिभाग के अलावा सेना और पुलिस की तैयारी करने में आसानी होने की उम्मीद थी लेकिन यह स्टेडियम कभी खेल और व्यायाम के काम नहीं आया।
उम्मीद थी लेकिन पूरी नहीं हो सकी
फोटो-4-अजय कुमार
असोहा निवासी अजय कुमार ने बताया कि क्षेत्र में बड़ी संख्या में युवा क्रिकेट खेलते हैं। क्रिकेट प्रेमी प्रतियोगिताएं भी कराते हैं। स्टेडियम बनने से खेल प्रशिक्षण मिलने की उम्मीद थी लेकिन वह पूरी नहीं हो सकी।
गंदगी से टहलने लायक भी नहीं
फोटो-5-दीपक कुमार
दीपक कुमार ने बताया कि स्टेडियम में खेल प्रशिक्षक या कोच न होने से युवाओं को लाभ नहीं मिल रहा, वहीं रखरखाव और मैदान की सफाई न होने से बड़े-बुजुर्ग सुबह-शाम टहलने में भी इसका उपयोग नहीं कर पा रहे हैं।
जिम्मेदार हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं
फोटो-6-शिवा सैनी
शिवा सैनी कहते हैं कि स्टेडियम में कोच की तैनाती हो तो क्षेत्र के युवाओं का खेलकूद के प्रति लगाव और बढ़ेगा। कई खेलों में यहां के युवा जिले और प्रदेश और देश में नाम रोशन कर सकते हैं लेकिन जिम्मेदार हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं।