बैंकों में करेंसी की किल्लत घटने लगी है। मंगलवार को पर्याप्त कैश होने से बैंक खाताधारक को 15 से 24 हजार के भुगतान किए गए। एसबीआई को देर शाम आरबीआई से 35 करोड़ की करेंसी मिली इससे समस्या काफी हद तक कम होगी। बैंकों ने तो राहत देना शुरू कर दिया है। मगर एटीएम में कैश न पहुंचने से लोगों की परेशानी बनी है।
नोटबंदी के बाद वैसे तो हर तरफ करेंसी को लेकर हायतौबा मची है। व्यापार से लेकर लोगों को घर खर्च तक के लिए खूब जद्दोजहद करनी पड़ रही है। पीएम के फैसले के 49वें दिन हायतौबा काफी हद तक कम नजर आई। मंगलवार सुबह बैंकों में लोग पहुंचने लगे थे, लेकिन अधिकांश बैंकों में कैश की उपलब्धता होने से कहीं भी किचकिच के हालात नहीं बने। एसबीआई व पीएनबी की शाखाओं ने 24 हजार तक के भुगतान कर खाताधारकों को राहत दी।
इसका नतीजा रहा कि प्रमुख राष्ट्रीय कृत बैंकों में लोगों की मारामारी नहीं रही। इसके अलावा इलाहाबाद बैंक, एचडीएफसी बैंक, सेंट्रल बैंक, देना बैंक, बैंक आफ बड़ौदा के साथ ही ग्रामीण बैंक आफ आर्यावर्त में भी 10 हजार तक के भुगतान खाताधारकों को किए गए। वहीं देर शाम एसबीआई मुख्य शाखा को आरबीआई ने लगभग 35 करोड़ की करेंसी भेजी है। बैंक सूत्रों की मानें तो करेंसी आने से बुधवार को बैंकों में कैश की किचकिच कम होना तय है। बैंकों में कैश होने से व्यवस्था पटरी पर लौटने लगी है लेकिन अधिकांश एटीएम का कैशलेस होना लोगों के लिए दिक्कतों का सबब बना है।
16 घंटे बंद रहे शहर के अधिकांश एटीएम
सरकार के लाख दावे के बाद भी जिले के एटीएम ढाई हजार की नगदी के साथ ही पांच सौ का नोट नहीं दे सके। एसबीआई के एटीएम को छोड़ सभी एटीएम 49 दिनों में लगभग कैशलेस ही बने रहे। सोमवार की शाम लगभग 6 बजे से पीएनबी, बैंक आफ इंडिया, आईसीसीआई, एक्सिस, एचडीएफसी, यूनियन बैंक, बैंक आफ बड़ौदा के एटीएम मंगलवार की सुबह 10 बजे तक कैशलेस बने रहे।
इससे शाम के वक्त शहर की सड़कों पर निकले लोग जैसे ही एटीएम की तरफ पहुंचते तो नो कैश का सिग्नल देख वापस लौट जाते। यह क्रम अगले दिन की सुबह 10 बजे तक चलता रहा। दोपहर बाद एक्सिस बैंक, आईसीआईसीआई व एचडीएफसी एटीएम में कैश आने के बाद सैकड़ों की भीड़ दो हजार की नगदी निकालने को दौड़ पड़ी।