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खांस-खांसकर दूसरों को बांट रहे टीबी का रोग

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उन्नाव। दो सप्ताह से अधिक समय तक खांसी आने पर बलगम की जांच कराने की नसीहत दी जाती है। स्वास्थ्य विभाग टीबी को जड़ से समाप्त करने के लिए इसका प्रचार प्रसार भी कर रहा है लेकिन जागरूक नहीं है। स्वास्थ्य विभाग के अभियान चलाने पर ऐसे मरीज मिलने लगे हैं जो टीबी से पीड़ित थे लेकिन उन्होंने अब तक जांच नहीं कराई थी। क्षय रोग विभाग अधिकारियों का कहना है कि अगर जांच में और देरी होती तो यह मरीज अपने आसपास के लोगों को इस बीमारी का शिकार बना सकते थे। फिलहाल टीबी से पीड़ित मिले 11 मरीजों का उपचार शुरू कर दिया गया है।
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केंद्र सरकार के पुनरीक्षित राष्ट्रीय क्षय नियंत्रण कार्यक्रम के तहत जिले में 186 टीमें गठित की गई थी। टीम में तीन सदस्य रखे गए थे। 26 दिसंबर से 9 जनवरी तक चले अभियान में स्वास्थ्य टीम घर घर जाकर लोगों की टीबी के आधार पर स्क्रीनिंग कर रही है। अब तक संदेह के आधार पर 234126 लोगों की स्क्रीनिंग के बाद 631 लोगों के बलगम की जांच कराई जा चुकी है। इनमें 11 लोग टीबी से पीड़ित मिले हैं। जिला क्षय रोग अधिकारी डा राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि टीबी से पीड़ित मरीजों का उपचार शुरू कर दिया गया है। समय पर अगर इन लोगों की पहचान न होती तो वह अपने आसपास के 15 लोगों को बीमार कर देते।

दो सप्ताह से अधिक खांसी हो तो न बरतें लापरवाही
जिला क्षय रोग अधिकारी डा राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि टीबी संक्रामक बीमारी है। अगर खांसी दो सप्ताह से अधिक समय तक आती है तो जांच में देरी न की जाए। पीड़ित व्यक्ति को फौरन बलगम की जांच करानी चाहिए। टीबी का इलाज पूरी तरह से निशुल्क है। जरूरी है कि टीबी समाप्त न हो जाने तक इलाज जारी रखा जाए।
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टीबी के लक्षण
हल्का बुखार होना
लगातार खांसी आना
खांसी के साथ खून आना

इंसेट
बचाव के उपाय
दो हफ्ते से अधिक खांसी आए तो गंभीरता से लें
टीबी के मरीजों से दूरी बनाकर रखें
पौष्टिक आहार लें
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