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न जांच किट ना ही प्लेटलेट्स, कागजों पर उपचार

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अमर उजाला ब्यूरो
उन्नाव। कानपुर, लखनऊ समेत प्रदेश के कई जिलों में डेंगू ने पांव पसार लिए हैं। जिले में भी अब तक पांच मरीज मिल चुके हैं। स्वास्थ्य विभाग डेंगू को लेकर अलर्ट घोषित कर चुका है, यह अलर्ट कागजों पर ही है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में डेंगू की जांच के लिए न तो किट है और न ही प्लेटलेट्स के इंतजाम हैं। महकमा लोगों को डेंगू से बचाव के लिए भी प्रेरित भी नहीं कर रहा है।


जुलाई माह को एंटी डेंगू माह के रूप में मनाने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने एक बार फिर से सभी जनपदों को डेंगू के प्रति सतर्क कर दिया है। सीमावर्ती जनपदों में कई मरीज डेंगू से पीड़ित पाए गए हैं। महानिदेशक चिकित्सा और स्वास्थ्य की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि वेक्टर जनित रोगों का समय चल रहा है। ऐसे में डेंगू के साथ-साथ मलेरिया व अन्य रोगों के फैलने की संभावनाएं रहती हैैं। इन रोगों से बचाव ही सबसे अच्छा उपचार है।
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अगर कोई मरीज वेक्टर जनित रोगों से ग्रसित पाया जाता है तो उसे बेहतर उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई जाए। जनपद में वेक्टर जनित रोगों की रोकथाम के लिए दिए गए निर्देश सिर्फ कागजों तक ही सीमित हैं। यहां न तो रोग के परीक्षण की सुविधा है और न किसी तरह की किट है। बुखार से पीड़ित मरीज के अस्पताल पहुंचने पर लक्षणों को देखते हुए नमूने को जांच के लिए लखनऊ भेज दिया जाता है। इसके बाद मरीज को उसके हाल पर छोड़ दिया जाता है। जांच के लिए भेजे गए नमूने के पॉजिटिव पाए जाने के बाद ही मरीज का अलग से उपचार शुरू हो पाता है। रोग की रोकथाम के लिये मलेरिया विभाग खास ध्यान नहीं दे रहा है। विभाग की ओर से दवा का छिड़काव भी नहीं कराया जा रहा है।


ब्लड बैंक में नहीं है प्लेटलेट्स की सुविधा
उन्नाव। डेंगू होने पर खून में प्लेटलेट्स की कमी हो जाती है। ऐसी स्थिति में मरीज को प्लेटलेट्स चढ़ाना होता है। जनपद में अगर किसी मरीज को प्लेटलेट्स की जरूरत पड़ती है तो उसे लखनऊ से कानपुर तक के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
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जिला अस्पताल में उपलब्ध हैं किट
सीएमओ डा. लालता प्रसाद ने बताया कि जिला अस्पताल में डेंगू व मलेरिया की जांच के लिए पर्याप्त मात्रा में किट उपलब्ध हैं। संदिग्ध मरीजों की जांच के बाद सैंपल लखनऊ भेजा जा रहा है। संक्रामक रोग विभाग की टीम भी एक्टिव है।

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डेंगू से बचाव को नहीं किया जा रहा प्रेरित
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