उन्नाव। केंद्र सरकार की सौभाग्य योजना से संतृप्त (विद्युतीकृत) हुए गांवों का सत्यापन होगा। प्रदेश के मुख्यमंत्री ने सत्यापन के आदेश दिए हैं। सत्यापन में देखा जाएगा कि गांव में बिजली पहुंची भी है या नहीं। यदि कागजों पर संतृप्तीकरण की पुष्टि होगी तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
2014 में केंद्र में सरकार बनाने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री सहज हर घर बिजली (सौभाग्य) योजना का शुभारंभ किया था। बड़ी बात यह थी कि सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ ने 2017 में जिले से प्रदेश को सौभाग्य दिया था। पहले चरण में इस योजना में 2011 की सामाजिक, आर्थिक जनगणना में दर्ज लोगों को मुफ्त बिजली कनेक्शन दिया जाना था। मार्च 2019 तक बिजली विभाग ने 225000 लोगों को बिजली कनेक्शन देने का दावा किया। बाद में योजना का दायरा बढ़ाते हुए हर गांव के प्रत्येक व्यक्ति को बिजली कनेक्शन देना था। बिजली कनेक्शन पहुंचाने के लिए विभाग को गांव तक रोशनी पहुंचाना था। जिले में ऐसे 1073 गांव चिह्निंत किए गए जिनमें बिजली नहीं थी। विभाग ने इन गांवों में एलटी लाइन बिछाई। ट्रांसफार्मर लगवाए और बिजली आपूर्ति चालू कराई। फिर गांव में रहने वाले ग्रामीणों को बिजली कनेक्शन दिया। शासन को भेजी गई लिस्ट में इन गांवों को बिजली से पूर्ण रूप से संतृप्त दिखाया। अब प्रदेश सरकार ने इन संतृप्त गांवों का सत्यापन कराने की रुपरेखा तैयार की है। 3 जून को हुई बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सौभाग्य योजना से दिए गए कनेक्शन और संतृप्त किए गए गांवों का सत्यापन कराने के आदेश दिए हैं। जानकारों की मानें तो सत्यापन के पीछे का मकसद यह जानना है कि असलियत में गांवों में बिजली जल रही है या केवल कागजों पर ही विद्युतीकरण दिखाया गया है।
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एमडी ने बिजली चोरी रोकने के दिए आदेश
बुधवार को मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड की प्रबंध निदेशक (एमडी) अर्पणा यू ने वीडियो कांफ्रे ंसिंग के जरिए बिजली चोरी रोकने के आदेश दिए हैं। एमडी ने स्थानीय अधिकारियों से बिलिंग की जानकारी ली। फिर दोटूक कहा कि अब शहर को 24 और गांव को 18 घंटे बिजली दी जा रही है। जबकि इसके सापेक्ष राजस्व नहीं आ रहा है। इसमें सुधार करें। हर हाल में बिलिंग बढ़ाएं। बिजली चोरी पर रोक लगाएं। अधिकारी फील्ड पर निकलें और जांच पड़ताल करें। जो बिजली चोरी करते मिले उसके खिलाफ तुरंत एफआईआर दर्ज कराएं।