गंजमुरादाबाद। हर एक युग में अन्याय ने न्याय को हराने का कुत्सित प्रयास किया लेकिन सदैव अन्याय को ही घुटने टेकने पड़े। सत्य परेशान हो सकता है लेकिन परास्त नहीं हो सकता। इसलिए मनुष्य को कभी भी सत्य का मार्ग नहीं छोड़ना चाहिए। यह उपदेश क्षेत्र के ग्राम बहलोलपुर स्थित हनुमान मंदिर परिसर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन कथावाचक कु. रुचि शास्त्री ने महाभारत की कथा सुनाते हुए दिए। कहा कि अन्याय सदैव सत्य का पीछा करता है लेकिन वह उसे घेर नहीं सकता है। अन्याय सीना तानकर सत्य के आगे खड़ा हो जाता है लेकिन उसके आगे टिक नहीं पाता है। किसी भी व्यक्ति को किन्हीं भी परिस्थितियों में सत्य का साथ नहीं छोड़ना चाहिए। यही जीवन का मूल मंत्र है। कुरुक्षेत्र में हुए महाभारत के युद्ध में कौरवों ने सदैव अन्याय पर मार्ग पर चलकर असत्य का साथ दिया जबकि पांडवों ने सत्य का साथ कभी भी नहीं छोड़ा। जोकि महाभारत के युद्ध का कारण बना। इससे कौरव परास्त हुए और पांडवों को विजयश्री प्राप्त हुई। महाभारत की कथा का प्रसंग सुनकर श्रोता भावविभोर हो गए।