यूपी पुलिस ने एक बार फिर इंसानियत को शर्मसार किया।
गुमशुदगी दर्ज होने के बावजूद पुलिस ने युवक के शव की पहचान कराना मुनासिब नहीं समझा और लावारिस में दाह संस्कार कर दिया।
परिवारवाले आखिरी कंधा देने से भी महरूम रह गए, लेकिन जैसे ही युवक की मां ने 22 दिन बाद आला अफसरों से शिकायत की, समझौते का दबाव बना रही पुलिस ने हत्यारोपी दोस्त को गिरफ्तार कर जेल भी भेज दिया।
सोमवार को एसएसपी आफिस पहुंची मंगू देवी ने एसपी क्राइम को दुखड़ा सुनाया। उन्होंने बताया कि वह मेरठ रोड पर मास्टर कालोनी में रहती है।
21 अप्रैल को उनके बेटे गौरव (17) को सोनू घर से बुलाकर ले गया था। गौरव किराए पर ट्रैक्टर चलाता था। तब से वह लापता था। 26 अप्रैल को उन्होंने मोरटा चौकी पर बेटे की गुमशुदगी लिखाई थी।
पुलिस ने उनके बेटे को नहीं तलाशा। वह खुद ही बेटे का फोटो लेकर उसे तलाशती रही। 11 मई को उन्हें पता चला कि 21 अप्रैल को गुलधर के पास उनके बेटे का शव रेलवे ट्रैक पर मिला था।
तब वह चौकी पहुंची तो पुलिसवालों ने उन्हें शव के फोटोग्राफ दिखाए, जिनसे उन्होंने बेटे की पहचान की। मंगू देवी ने आरोप लगाया कि उनके बेटे की सोनू ने हत्या की है।
जब उन्होंने बेटे के हत्यारोपी की गिरफ्तारी के लिए पुलिसवालों को कहा, तो एक पुलिसवाले ने उन्हें सलाह दी कि ‘अम्मा! जो जाना था चला गया, अब समझौता कर लीजिए।’
तब वह एसपी क्राइम से मिली। यह जानकारी होते ही पुलिसवाले हरकत में आए और सोनू को हत्या में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। सोनू भी मास्टर कालोनी मेरठ रोड का रहने वाला है।
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‘ मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी कि नियमानुसार कार्रवाई हुई या नहीं। पुलिसवाले अगर दोषी होंगे तो उन्हें बख्शा नहीं जाएगा।’ - एसपी क्राइम, राम अभिलास त्रिपाठी
ये थी पुलिस की कहानी
21 अप्रैल को पुलिस को गुलधर के पास एक शव मिला था। पुलिस का कहना था कि ट्रेन की खिड़की पर खड़ा होने के कारण झटके से वह गिरा और उसकी मौत हो गई। जबकि अब पता चला है कि वह गौरव था, जिसे उसके परिजन हत्या का मामला बता रहे हैं। इससे पुलिस की जांच पर सवालिया निशान लगता है।