जानकारों के मुताबिक यदि पुलिस अतीक और अशरफ को रिमांड पर लेने की कवायद करती तो उसे वारदात से जुड़े सुबूतों को बरामद कराना पड़ता, लेकिन पुलिस इसमें काफी पीछे रही।
वहीं, अतीक के खिलाफ जारी अन्य मुकदमों के विचारण में उल्लेखनीय प्रगति नहीं होने से उस पर कानूनी शिकंजा नहीं कसा जा सका। अब गुजरात में उसे जेल मैनुअल के मुताबिक सजायाफ्ता बंदियों के कपड़े पहनने पड़ेंगे।
अब हफ्ते में तीन बार की जगह केवल 15 दिन में एक बार परिजन मिल सकेंगे। उसे जेल काम भी करना पड़ेगा, जिसका मेहनताना भी मिलेगा।
साबरमती जेल में अतीक अहमद अब कैदी नंबर 17052 के रूप में जाना जाएगा। सजायाफ्ता कैदी के रूप में शुक्रवार को जेल प्रशासन ने अतीक का नंबर जारी कर दिया। वह कैदियों वाली ड्रेस पहनेगा और जेल में काम भी करना होगा। उसके सामने जेल मैनुअल के हिसाब से विभिन्न कार्यों की सूची सौंपी गई है। जो भी काम अतीक चुनेगा, उसे करना पड़ेगा।
लंबे सफर से अतीक के शरीर में रहा दर्द