सुल्तानपुर। जिले में लावारिस कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ रही है। पिछले दो साल में कुत्तों के काटने के मामलों में 85,100 एंटी रेबीज डोज लगाई गई हैं। इसके बावजूद नगर पालिका और नगर पंचायतों ने नसबंदी के लिए एक भी कुत्ता पशुपालन विभाग को नहीं दिया।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, वर्ष 2024 में 39,600 और वर्ष 2025 में 45,500 एंटी रेबीज डोज लगीं। इनमें से करीब 75 फीसदी डोज कुत्तों के काटने के मामलों में इस्तेमाल हुईं। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी सुनील कुमार ने बताया कि नगर पालिका और चार नगर पंचायतों (कोइरीपुर, लंभुआ, कादीपुर, दोस्तपुर) ने नसबंदी के लिए एक भी कुत्ता नहीं दिया। अब एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) कार्यक्रम के तहत केंद्र बनाने की तैयारी शुरू की गई है।
मेडिकल कॉलेज में भी कुत्ते और अन्य जानवरों के काटने के मामले लगातार आ रहे हैं। जून में 3,600, जुलाई में 3,875 और अगस्त में 3,300 लोगों को वैक्सीन लगी। 22 सितंबर तक 2,530 लोग वैक्सीन लगवा चुके हैं। मेडिकल कॉलेज में रोजाना औसतन सौ से ज्यादा लोग वैक्सीन लगवाने पहुंच रहे हैं।
नसबंदी के स्थायी इंतजाम नहीं
नगर पालिका के पास कुत्तों को पकड़ने के लिए कैटल कैचर और रिकवरी वैन है। पकड़े गए कुत्तों को शहर से बाहर छोड़ा जाता है, पर नसबंदी का स्थायी केंद्र नहीं है। एनिमल बर्थ कंट्रोल कार्यक्रम के तहत कूरेभार और दूबेपुर ब्लॉक में जमीन चिह्नित की गई है। केंद्र बनने पर पकड़े गए कुत्तों की नसबंदी और सर्जरी होगी। ऑपरेशन के बाद दो-तीन दिन निगरानी में रखकर इलाज व देखभाल की जाएगी। ईओ लाल चंद्र सरोज ने बताया कि सीएंडडीएस डीपीआर तैयार कर रही है, जिसे शासन को भेजा जाएगा।
संवेदनशील स्थानों पर कुत्तों के झुंड
रेलवे स्टेशन, मुख्य बाजार, मोहल्लों और स्कूलों के आसपास लावारिस कुत्तों के झुंड दिखते हैं। बच्चों और राहगीरों को इनके बीच से गुजरना पड़ता है, जिससे खतरा बना रहता है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश हैं कि अस्पताल, स्कूल, बस अड्डे और रेलवे स्टेशन जैसे संवेदनशील स्थान आवारा कुत्तों से सुरक्षित रहें। इसके बावजूद इन जगहों पर कुत्तों की मौजूदगी बनी हुई है।