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सीता की कृपा बिना राम नहीं मिलते : राम भद्राचार्य

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विजेथुआ महावीरन धाम में वाल्मीकि रामायण की कथा सुनाते प्रवाचक स्वामी रामभद्राचार्य - फोटो : विजेथुआ महावीरन धाम में वाल्मीकि रामायण की कथा सुनाते प्रवाचक स्वामी रामभद्राचार्य
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सूरापुर। सीताराम हमारे आराध्य हैं। बिना सीता की कृपा के राम नहीं मिलते। बिना राम की कृपा के सीता नहीं मिलतीं। यदि दोनों को पाना है तो सद्गुरु की शरण में जाना पड़ेगा। सीता नित्य राम के पास रहती हैं। ये बातें तुलसी पीठाधीश्वर स्वामी राम भद्राचार्य ने कहीं। वे विजेथुआ महोत्सव के चौथे दिन वाल्मीकि रामायण सुना रहे थे।
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उन्होंने कहा कि जब तक समाज में बेटी को कम आंका जाएगा, किसी का कल्याण नहीं होगा। समाज को चाहिए कि बेटी का ठीक से पालन करे। बेटे के जन्म के समय जो उत्साह होता है, उससे सौ गुना ज्यादा बेटी के लिए होना चाहिए। राम जैसा मर्यादा संपन्न स्वामी और हनुमान जैसा मर्यादा संपन्न सेवक दूसरा कोई नहीं है। उन्होंने बताया कि विजेथुआ में हनुमान स्वयंभू हैं, इन्हें किसी ने स्थापित नहीं किया। औरंगजेब भी इस मंदिर को तोड़ने का साहस नहीं कर पाया।
अंग्रेजों ने सौ फीट तक खोदाई की, लेकिन हनुमान जी की मूर्ति का तल नहीं खोज पाए। बताया कि 17 मई 1971 को वे पहली बार विजेथुआ आए थे। अपने पैतृक घर से पैदल आकर यहां अपना व्रत तोड़ा था। कथा के दौरान ही राम भद्राचार्य ने गांवों में चल रही चोरी की अफवाहों पर नाराजगी जताई। कहा कि इस पर न सरकार ध्यान दे रही है और न ही उसके अधिकारी। कथा से पूर्व आयोजक विवेक तिवारी ने सपत्नीक व्यास पीठ का पूजन किया। इस अवसर पर भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रेम शुक्ल, बिहार क्षेत्र संगठन मंत्री नागेंद्र नाथ, पूर्व मंत्री अशोक कटियार, भाजपा जिलाध्यक्ष सुशील त्रिपाठी, नगर पालिका अध्यक्ष प्रवीण अग्रवाल, ज्ञानेंद्र विक्रम सिंह सहित बड़ी संख्या में श्रोता मौजूद रहे।
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