सुल्तानपुर। बारिश थमने के बाद शहर के पुराने मोहल्लों में जर्जर भवनों की हकीकत सामने आती है। दीवारों का प्लास्टर गिर रहा है और छतों से पानी टपक रहा है। कई मकानों की दीवारों में चौड़ी दरारें हैं, जिससे लोग बच्चों को बाहर निकाल देते हैं।
प्रतापगढ़ में 2026-08-01 सुबह एक जर्जर मकान गिरने से छह लोगों की मौत हो गई थी। जिले में भी ऐसे 250 से अधिक निजी मकान जर्जर अवस्था में हैं। करीब 600 सरकारी भवन जर्जर घोषित किए जा चुके हैं। इन्हें खाली कराने और ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया चल रही है। निजी जर्जर भवनों की संख्या का कोई सरकारी आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।
600 सरकारी भवन जर्जर
सरकारी भवनों के लिए व्यवस्था तय है। बेसिक शिक्षा विभाग ने 546 विद्यालय भवनों और 19 शौचालयों का मूल्यांकन कराया है। पीडब्ल्यूडी ने एजुकेशन कॉलोनी के चार और ऑफिसर्स कॉलोनी के एक भवन को जर्जर घोषित किया है। कलेक्ट्रेट के दो पुराने निर्वाचन कार्यालय खाली कराए गए हैं। पंचायतीराज विभाग ने भी आठ पंचायत भवनों को अनुपयोगी घोषित किया है।
जर्जर भवनों में रहते हैं लोग, चलती दुकानें
शहर के पुराने बाजारों और घनी बस्तियों में कई निजी मकान तथा व्यावसायिक भवन वर्षों से जर्जर हैं। दरियापुर, राइननगर, कृष्णानगर, खैराबाद, पंचरास्ता, राहुल चौराहा, बस स्टेशन और गोलाघाट क्षेत्रों में 250 से अधिक जर्जर मकान हैं। इन भवनों में परिवार रहते हैं और दुकानें चलती हैं। नगर पालिका गृहकर और जलकर वसूलती है, पर उसके पास जर्जर निजी भवनों का कोई रिकॉर्ड नहीं है।
ऐसे भवनों का आंकड़ा नहीं
अधिशासी अधिकारी लालचंद्र सरोज ने बताया कि पालिका के पास ऐसे भवनों का आंकड़ा नहीं है। विनियमित क्षेत्र के जेई उमेश चंद्र के अनुसार उनके विभाग का काम मानचित्र स्वीकृत करना और नियमों के विपरीत निर्माण पर नोटिस देना है। जर्जर भवनों का सर्वे या उन्हें असुरक्षित घोषित करना विनियमित क्षेत्र के दायरे में नहीं आता।