- 2016 में अमेठी तहसील में हुई थी हत्या, पत्नी ने ही दर्ज कराया था केस
संवाद न्यूज एजेंसी
सुल्तानपुर। अमेठी में सीजनल संग्रह अमीन की हत्या के मामले में मृतक की पत्नी ही अदालत में गवाही देने से मुकर गई। तीन संग्रह अमीन व एक अन्य गवाह भी इस मामले में पहले ही कोर्ट में ठोस गवाही नहीं दे सके हैं। एडीजे प्रथम इंतेखाब आलम ने साक्ष्य के अभाव में मामले में नामजद तीन आरोपियों को बरी कर दिया है।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता अरविंद सिंह राजा ने बताया कि पूरे चेत पांडेय मौजा कोरारी लच्छन शाह निवासी दान बहादुर अमेठी तहसील में सीजनल संग्रह अमीन थे। वे 21 जून 2016 को पत्नी हीरावती के साथ इलाहाबाद बैंक की अमेठी शाखा रुपया निकालने गए थे। रुपया निकालने के बाद दान बहादुर अमेठी तहसील आ गए थे। आरोप है कि दान बहादुर को तहसील परिसर में आरोपियों ने डंडे व बंदूक की बट से मारकर घायल कर दिया था। गंभीर हालत में उन्हें ट्रामा सेंटर लखनऊ में भर्ती कराया गया जहां इलाज के दौरान 28 जून 2016 को उनकी मौत हो गई थी।
पुलिस ने मृतक की पत्नी हीरावती की तहरीर पर पूरे पतेरवा कोरारी लच्छन शाह निवासी जगदीश यादव, शिवपुर निवासी राकेश यादव व धम्मौर थाने के रहमापुर निवासी उमेश यादव के खिलाफ हत्या का केस दर्ज किया था। मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से छह गवाह कोर्ट में पेश किए गए। इसमें मृतक की पत्नी हीरावती, अमीन चंद्रभान पांडेय, संग्रह अमीन राजाराम यादव व चंद्रपाल यादव और एक अन्य गवाह धर्मराज गवाही देने से ही मुकर गए। इससे आरोपियों पर केस साबित नहीं हो पाया। कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में तीनों आरोपियों को बरी कर दिया है।