माध्यमिक शिक्षा परिषद से जारी नए दिशा निर्देश उन विद्यालयों पर भारी पड़ सकते हैं, जहां प्रबंधक और प्रधानाचार्य के मध्य विवाद है। बोर्ड ने ऐसे किसी भी विद्यालय को परीक्षा केंद्र नहीं बनाने का फैसला किया है। इसके अलावा ऐसे परीक्षा केंद्रों को भी दोबारा केंद्र नहीं बनाया जाएगा, जहां का परीक्षाफल वर्ष 2015-16 में 20 प्रतिशत से कम रहा है।
माध्यमिक शिक्षा परिषद ने वर्ष 2017 में होने वाली हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट की बोर्ड परीक्षा के लिए नीति निर्धारण का काम जिला स्तरीय कमेटी को सौंपा है। नीति निर्धारण के लिए सचिव की ओर से भेजा गया पत्र जिले के डीआईओएस कार्यालय को प्राप्त हो चुका है। जारी पत्र को आधार मानें तो जिले के उन विद्यालयों को इस वर्ष परीक्षा केंद्र नहीं बनाया जाएगा, जहां प्रबंधकों व प्रधानाचार्यों के मध्य विवाद है।
बीते वर्ष परीक्षा केंद्र रहे ऐसे स्कूल कॉलेजों को भी केंद्र नहीं बनाया जा सकेगा, जिनका रिजल्ट 20 फीसदी से कम रहा है। वे विद्यालय भी परीक्षा केंद्र नहीं बन सकेंगे, जिनमें बीते तीन वर्षों के दौरान कभी भी शिक्षा विभाग या जिला प्रशासन के निरीक्षण के समय सचल दल के सदस्यों के साथ अभद्र व्यवहार किया गया हो। ग्रामीण व शहरी क्षेत्र के विद्यालयों में अध्ययनरत बालिकाओं को स्वकेंद्र की सुविधा प्राप्त होगी।
शिक्षा परिषद ने शत- प्रतिशत स्टाफ बदलने के बाद ऐसे राजकीय या अशासकीय विद्यालयों को केंद्र बनाने की अनुमति भी दे दी है, जो शासन की काली सूची में दर्ज हैं। इसके अलावा एक प्रबंधक की ओर से संचालित विद्यालय के छात्र-छात्राओं को उनके दूसरे विद्यालय में आवंटित नहीं करने का निर्देश भी जिला विद्यालय निरीक्षक को दिया गया है।