सुल्तानपुर। देवोत्थानी एकादशी के बाद से मांगलिक आयोजन शुरू हो जाएंगे। वैवाहिक कार्यक्रम 19 नवंबर से 11 दिसंबर तक चलेंगे। 16 दिसंबर से खरमास शुरू हो रहा है।
लड़के व लड़की के परिवार वाले शादी की तैयारी में जोर-शोर से जुट गए हैं। कोई मैरिज लॉन में तो कोई अपने घर पर ही विवाह की पूरी रस्म निभाएगा। सराफा की दुकानों पर जेवरात बनवाने के लिए लोग पहले से ही ऑर्डर दे चुके हैं।
हिंदू धर्म में शादी दो शरीर का नहीं बल्कि दो आत्माओं का मिलन है। इन शादियों में यदि रीति-रिवाज और रस्में न हों तो विवाह अधूरा सा लगता है। विवाह में होने वाली सभी रस्में जिंदगी भर हमारे जेहन में रह जाती हैं।
हर हिंदू धर्म की शादियों में कहने को रीति-रिवाज कुछ अलग हो सकते हैं, लेकिन इनका अर्थ समान होता है। इसके अलावा जो एक बात हर णहिंदू शादी में समान है, वह है सात फेरों का पवित्र अनुष्ठान।
वर और वधू पवित्र अग्नि के चारों ओर ली गई ये सात कसमें भारतीय शादियों के सबसे महत्वपूर्ण अनुष्ठानों में एक है। इस दौरान वर-वधू अग्नि को साक्षी मानकर सात फेरे लेते हुए एक-दूसरे को सात वचन देते हैं। इस अनुष्ठान के साथ ही वर-वधू अपने नए जीवन की शुरुआत करते हैं।
19 नवंबर से शुरू हो रहे लग्न को देखते हुए सराफा व किराना व्यापारी तैयारी में लगे हैं। सराफा व्यापारी अपने ग्राहकों से एक माह पहले ही ऑर्डर ले चुके हैं। शहर के मैरिज लॉन में तैयारी शुरू हो गई है। शहर के सभी मैरिज लॉन काफी पहले से बुक हो चुके हैं।
संचालन मैरिज लॉन को चमकाने के लिए विद्युत झालर, रंगाई-पुताई का कार्य करवा रहे हैं। ताकि वैवाहिक कार्यक्रम में लोगों को अधिक से अधिक सुविधा दी जा सके। वहीं ग्रामीण क्षेत्र के अधिकांश लोग घर पर ही बारात की अगवानी करेंगे। बारातियों के ठहरने के लिए खेत-खलिहान की साफ-सफाई कराने में जुट गए हैं। 19 नवंबर से 11 दिसंबर तक शहर व ग्रामीण अंचल में शहनाइयों की धूम रहेगी।