धनपतगंज (सुल्तानपुर)। बारिश से उफनाई गोमती नदी का जलस्तर पांचवें दिन स्थिर हो गया। जलस्तर ठहरने के बाद नदी के मुहाने पर बसे करीब आधा दर्जन गांवों में कटान का खतरा बढ़ गया है। प्रभावित गांवों में पशुओं व ग्रामीणों में संक्रमण का खतरा बना है। ग्रामीणों के सामने मवेशियों के चारे की समस्या खड़ी हो गई है।
पांच दिनों से गोमती नदी के जलस्तर में हो रही बढ़ोतरी से क्षेत्र के अमऊ, जासरपुर, बगीयवा, पूरे शुकलाने के संपर्क मार्ग डूब गए हैं। गांवों की फसल जलमग्न हो गई है। रविवार को नदी का पानी स्थिर हाेने से प्रभावित गांवों के लोगों ने राहत की सांस ली है लेकिन जलभराव से होने वाली परेशानियों ने उन्हें चिंता में डाल दिया है।
अमऊ निवासी नीरज ने बताया कि गांव के चारों तरफ पानी भरा है। कीचड़ और गंदे पानी से मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है। शुकलाने निवासी उमाकांत शुक्ल ने बताया कि गांव के हैंडपंप गंदा पानी दे रहे हैं। पशुओं का टीकाकरण अभी तक नहीं कराया गया। इस वजह से पशुओं के लिए भी खतरा बना है।
सिंहोरिया निवासी पंच नरायन व शंकर मिश्रा ने कहा कि पानी घटने के बाद धूप लगने से फसलें गल जाएंगी। गांव में वायरल बुखार के मरीज बढ़ रहे हैं। अभी तक दवा का छिड़काव नहीं कराया गया और न ही क्लोरीन की गोलियां बांटी गई हैं। गांव के निचले हिस्से में जानवरों के लिए बनी पशुशाला और चारा भंडारण वाले स्थान में पानी भरने से चारे की समस्या खड़ी हो हो गई है। गांव में नदी के किनारे स्थित कृषि योग्य भूमि का कटान हो रहा है।
ग्रामीणों को उपलब्ध कराई जाएगी सहायता
तराई के प्रभावित क्षेत्रों परनजर रखी जा रही है। संबंधित लेखपालों को लगाया गया है। रिपोर्ट के आधार पर ग्रामीणों को सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
-विदुषी सिंह, एसडीएम बल्दीराय