बल्दीराय (सुल्तानपुर)। स्थानीय तहसील के हलियापुर गांव में बृहस्पतिवार की सुबह छप्पर के मकान में सो रहे एक परिवार पर कच्ची दीवार ढह गई। चीख-पुकार के बाद पहुंचे ग्रामीणों ने मलबे के नीचे दबे चार लोगों को बाहर निकाला, लेकिन तब तक पिता-पुत्र की मौत हो चुकी थी। गंभीर रूप से घायल पत्नी व बेटी को ग्रामीणों ने जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने पत्नी की नाजुक हालत को देखते हुए ट्रॉमा सेंटर लखनऊ रेफर कर दिया। सूचना मिलते ही एसओ और कानूनगो घटनास्थल पर पहुंच गए और स्थिति का जायजा लिया।
हलियापुर थाना क्षेत्र के हलियापुर गांव निवासी दलित रामअचल उर्फ ढोड़े (55) का छप्पर का मकान है। बुधवार रात भोजन के बाद रामअचल अपनी पत्नी बचना (52), पुत्र ह्रदयराम (16) व बेटी आरती (10) के साथ चारपाई पर सो रहे थे। रात में बरसात हो रही थी। बृहस्पतिवार की सुबह करीब चार बजे जिस मिट्टी की दीवार पर छप्पर रखा था, वह अचानक भरभराकर परिवार के लोगों पर गिर पड़ी।
चीख-पुकार के बाद आसपास के ग्रामीण भागकर वहां पहुंचे और मलबे में दबे चारों लोगों को बाहर निकाला, लेकिन तब तक राम अचल और ह्रदयराम की मौत हो चुकी थी। गंभीर रूप से घायल बचना और आरती को जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने बचना की नाजुक हालत को देखते हुए ट्रॉमा सेंटर लखनऊ रेफर कर दिया।
ग्रामीणों की सूचना के बाद थानाध्यक्ष अरशद खां, कानूनगो रामसमुझ और लेखपाल राम कुमार मौके पर पहुंच गए। पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। कानूनगो ने बताया कि घटना की रिपोर्ट एसडीएम को भेजी जा रही है। पीड़ित परिवार को जल्द ही आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
बेहद गरीब है परिवार
हलियापुर गांव निवासी रामअचल के परिवार में पत्नी के साथ ही पांच बेटे और चार बेटियां हैं। बेटों में तिलकराम, सहजराम, जगतराम, राजितराम हैं। सबसे छोटा बेटा ह्रदयराम था। बेटियों में लक्ष्मी, पूजा, दुर्गा और आरती हैं। पिता ने तीन बेटियों की शादी कर दी थी, जबकि आरती की शादी होनी बाकी है। रामअचल के दो बेटे तिलकराम और सहजराम परदेस में मजदूरी करते हैं। जगतराम व राजितराम घर पर ही रहते हैं। हादसे के वक्त जगतराम और राजितराम घर के दूसरे हिस्से में सो रहे थे। इसलिए वे बच गए।