रेलवे के वॉकी-टॉकी सेट अब सही ढंग से काम नहीं कर पा रहे हैं। रेलवे की अहम व्यवस्था में शुमार इस उपकरण के संचालन में अवरोध से अब कार्य प्रभावित होने लगे हैं। स्थानीय रेलखंड के सुल्तानपुर डिवीजन में 65 अधिकारियों को दी गई वॉकी-टॉकी की बैट्रियां बेकार हो चुकी हैं। इससे ऐन वक्त पर वॉकी-टॉकी स्विच ऑफ हो जाते हैं। चार्जिंग के बाद ही इनका संचालन शुरू होता है। मैसेज पास आउट न होने से रेल अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
ट्रेनों के संचालन व अन्य व्यवस्थाओं के लिए स्थानीय रेल खंड के विभिन्न अधिकारियों को महकमे की ओर से वॉकी-टॉकी उपलब्ध कराया गया है। इस व्यवस्था के अंतर्गत रेलवे विभाग के अधिकारी निरंतर ट्रेनों के गार्डों व अन्य सेक्शन के संपर्क में रहते है। जरूरी संदेशों के आदान-प्रदान के लिए यह व्यवस्था संचालित की गई है। वायरलेस सिस्टम से लैस वॉकी-टॉकी समय के साथ अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ा रही हैं। विभागीय आंकड़ों की मानें तो स्थानीय रेल खंड के अंतर्गत स्टेशन अधीक्षक, स्टेशन मास्टर, एक्सप्रेस, मेल, पैसेंजर व माल गाडिय़ों के गार्डों समेत 65 अधिकारियों को वॉकी-टॉकी दिया गया है। इसके अलावा शंटिग मास्टरों व केबिन मैन को भी वॉकी-टॉकी की सुविधा दी गई है जिनसे कार्य के दौरान ट्रेनों के संचालन की स्थिति के बारे में संदेश प्रसारित किया जाता है। अन्य महत्वपूर्ण कार्यों के लिए भी वॉकी-टॉकी यंत्र का प्रयोग किया जाता है।
एचवाईटी कंपनी के वॉकी-टॉकी शुरुआती दौर में तो रेलवे अधिकारियों के लिए काफी सुविधाजनक थे। समय के साथ-साथ इस उपकरण की व्यवस्था में सुधार के लिए विभाग की ओर से पिछले तीन साल से कोई भी कदम नहीं उठाया गया। इस वजह से वॉकी-टॉकी की बैट्रियों ने अब बैकअप देना कम कर दिया है। नए सिस्टम के तहत एक बार चार्ज करने पर वॉकी-टॉकी आठ से 10 घंटे तक आसानी से संचालित होते थे।
अब बैट्रियां पुरानी होने के चलते एक घंटे भी बैकअप नहीं मिल पा रहा है। ट्रेनों के पास आउट होने व स्टापेज के समय अक्सर वॉकी-टॉकी स्विच ऑफ हो जाते हैं। इस वजह से ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों की मुसीबत बढ़ जाती है। आनन-फानन में अधिकारियों को वॉकी-टॉकी के संचालन के लिए चार्जिंग का सहारा लेना पड़ता है। इस अव्यवस्था ने रेलवे के अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ा दी है। मैसेज पास आउट करने में असुविधा हो रही है।