सुल्तानपुर। महिलाओं के नाम पर वाहन खरीदने का चलन तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन ड्राइविंग लाइसेंस (डीएल) बनवाने के मामले में उनकी भागीदारी बेहद कम है। परिवहन विभाग के आंकड़े बता रहे हैं कि हर साल हजारों महिलाएं वाहन मालिक बन रही हैं, लेकिन सड़क पर वैध चालक के रूप में मौजूदगी बेहद सीमित है।
जिले में एक जून 2025 से 11 जून 2026 तक कुल 22,203 ड्राइविंग लाइसेंस जारी किए गए। जिसमें 21,307 लाइसेंस पुरुषों और महज 896 महिलाओं के नाम बने। पूरे साल में लाइसेंस बनवाने वालों में महिलाओं की हिस्सेदारी पांच फीसदी से भी कम रही।
इसी अवधि में जिले में 28,898 वाहनों का पंजीकरण हुआ। परिवहन विभाग के पोर्टल के मुताबिक करीब 35 फीसदी वाहन महिलाओं के नाम पर दर्ज हैं। अनुमान के अनुसार एक साल में लगभग 10 हजार वाहन महिलाओं के नाम पंजीकृत हुए। इनमें दोपहिया, कार और व्यावसायिक वाहन भी शामिल हैं।
सिर्फ मालिक, चालक नहीं
विशेषज्ञों के अनुसार टैक्स और पारिवारिक सुविधाओं के कारण महिलाओं के नाम वाहन खरीदने का चलन बढ़ा है। कई बार जन्मदिन, शादी या अन्य अवसरों पर महिलाओं के नाम वाहन उपहार स्वरूप खरीदे जाते हैं, लेकिन वाहन चलाने और लाइसेंस बनवाने की जिम्मेदारी पुरुषों तक ही सीमित रह जाती है।
बिना डीएल पकड़े गए तो 5 हजार तक जुर्माना
पीटीओ शैलेंद्र त्रिपाठी ने बताया कि बिना वैध ड्राइविंग लाइसेंस के वाहन चलाने पर अधिकतम पांच हजार रुपये तक का जुर्माना और तीन महीने की जेल या दोनों हो सकता है। दुर्घटना की स्थिति में चालक के पास लाइसेंस न मिलने पर बीमा क्लेम में भी दिक्कत आती है। जिले में वर्तमान में 15 लाख से अधिक ड्राइविंग लाइसेंस पंजीकृत हैं।
इनसेट
महिलाओं के पीछे रहने की प्रमुख वजहें
सुरक्षा को लेकर परिवारों की आशंकाएं
सामाजिक और पारिवारिक दबाव
महिलाओं के नाम वाहन, लेकिन संचालन पुरुषों द्वारा
डीएल की अनिवार्यता को लेकर कम जागरूकता
महिलाओं की चेकिंग में अपेक्षाकृत नरमी की धारणा-
वर्जन
लाइसेंस बनवाने में भागीदारी कम
महिलाओं के नाम वाहन पंजीकरण की संख्या बढ़ रही है, लेकिन लाइसेंस बनवाने में उनकी भागीदारी अभी भी बहुत कम है। छात्राएं और कामकाजी महिलाएं अपेक्षाकृत अधिक डीएल बनवा रही हैं। महिलाओं को इसके लिए जागरूक किया जा रहा है।
-अलका शुक्ला, उप संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रशासन)
(संवाद)