सुल्तानपुर। जिला बार एसोसिएशन चुनाव की मतगणना बृहस्पतिवार को मतपत्रों की संख्या पर उठे सवालों के बाद हंगामे में बदल गई। प्रत्याशियों के समर्थकों ने धांधली का आरोप लगा विरोध शुरू कर दिया। विवाद बढ़ने पर अधिवक्ताओं के बीच धक्का-मुक्की और हाथापाई हुई। कुछ लोगों ने एक-दूसरे पर कुर्सियां फेंकीं। स्थिति बिगड़ती देख एल्डर्स कमेटी ने मतगणना रुकवा दी। बाद में चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल उठने का हवाला देते हुए पूरी चुनाव प्रक्रिया निरस्त कर दी गई।
अधिवक्ता संघ भवन में नए पदाधिकारियों के चुनाव की मतगणना चल रही थी। चुनाव कमेटी के सदस्य मतपत्रों की छंटाई कर रहे थे। इसी दौरान कुछ प्रत्याशियों के पक्ष में एक साथ कई मतपत्र मिलने और दो मतपेटियों में मतपत्रों की संख्या संदिग्ध होने की बात सामने आई। इस पर प्रत्याशियों और उनके समर्थकों ने आपत्ति जताई। देखते ही देखते मामला मारपीट तक पहुंच गया। बीच-बचाव कर रहे अधिवक्ताओं को भी आक्रोश का सामना करना पड़ा। एल्डर्स कमेटी के अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद दुबे के निर्देश पर मतगणना रोक दी गई। कुछ देर बाद अध्यक्ष की ओर से चुनाव प्रक्रिया निरस्त किए जाने का पत्र जारी कर दिया गया।
मतपेटी खाली मिलने का आरोप
महासचिव पद के प्रत्याशी जयंत मिश्र ने आरोप लगाया कि मतदान के बाद सभी की मौजूदगी में मतपेटियां सील की गई थीं। मतगणना के दौरान एक बक्सा खाली मिला, जबकि दूसरे में महज कुछ मतपत्र मिले। उन्होंने चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए।
जिला जज से मिले अधिवक्ता
एल्डर्स कमेटी के अध्यक्ष और घटना के दौरान आक्रोश का सामना करने वाले कुछ अधिवक्ताओं ने जिला जज सुनील कुमार से मुलाकात कर पूरे मामले की जानकारी दी। घटना के बाद दीवानी परिसर में देर तक गहमागहमी बनी रही।
चार दिन में दोबारा चुनाव की चुनौती
अधिवक्ता संघ की नियमावली के अनुसार निवर्तमान पदाधिकारियों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद एल्डर्स कमेटी को चुनाव कराने के लिए एक माह का समय मिलता है। मौजूदा कमेटी का कार्यकाल 14 अगस्त से 14 सितंबर तक है। चुनाव निरस्त होने के बाद नई प्रक्रिया कराने के लिए कमेटी के पास अब महज चार दिन बचे हैं। ऐसे में नई अधिसूचना जारी कर चुनाव कराना चुनौतीपूर्ण होगा।
सामान्य सभा की अनुमति से बढ़ सकता है समय
बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष रणजीत सिंह त्रिसुंडी के मुताबिक मौजूदा स्थिति में एल्डर्स कमेटी कार्यकाल समाप्त होने से पहले सामान्य सभा की बैठक बुला सकती है। सदन की अनुमति से चुनाव के लिए अतिरिक्त समय लिया जा सकता है। इसके अलावा सदन की अनुमति से नई कमेटी गठित कर चुनाव कराने का रास्ता भी निकाला जा सकता है।