सुल्तानपुर। मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला पुरुष अस्पताल के अल्ट्रासाउंड कक्ष में एक साल से ताला लटका है। रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती न होने के कारण अल्ट्रासाउंड मशीन होने के बाद भी जांच ठप पड़ी है। इससे मरीजों को निजी डायग्नोस्टिक सेंटरों पर जाकर महंगी जांच करानी पड़ रही है। मरीजों व तीमारदारों का कहना है कि मेडिकल काॅलेज से संबद्ध होने के बावजूद जिला अस्पताल में इलाज संबंधी सुविधाओं का टोटा है।
मेडिकल कॉलेज बनने के बाद जिला पुरुष व महिला अस्पताल को उससे संबद्ध कर चिकित्सा शिक्षा विभाग के अधीन कर दिया गया है। जुलाई 2022 में शासन ने जिला पुरुष अस्पताल से सात चिकित्सकों का स्थानांतरण गैर जिले में कर दिया था। इसमें रेडियोलाजिस्ट डॉ. शारदा रंजन भी शामिल थे।
इसके बाद से ही जिला अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट चिकित्सक की तैनाती न होने से अल्ट्रासाउंड कक्ष में ताला लटक रहा है। इससे जिला पुरुष अस्पताल में अल्ट्रासाउंड कराने के लिए पहुंचने वाले मरीजों व तीमारदार को निजी केंद्रों पर जाकर जेब ढीली करनी पड़ रही है।
जिला चिकित्सालय में हर दिन करीब 50 मरीज अल्ट्रासाउंड जांच कराने के लिए आते हैं। जांच न हो पाने से इन्हें निराश होकर निजी केंद्रों पर जाना पड़ता है। रस्म अदायगी के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से सीएमओ कार्यालय में तैनात डिप्टी सीएमओ डॉ. राधावल्लभ को अस्पताल के रेडियोलॉजिस्ट की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उनका काम भी बस मेडिको लीगल केस की रिपोर्ट बनाने तक ही सिमटा रहता है। सामान्य मरीजों को उनकी सेवा का फायदा कभी नहीं मिल पाता है।
बाहर जाकर करानी पड़ रही जांच
पेट दर्द की शिकायत के बाद अस्पताल में दिखाने आया था। ओपीडी में डॉक्टर ने अल्ट्रासाउंड जांच के लिए लिखा। जांच कक्ष में ताला लटका मिलने पर छह सौ रुपये देकर बाहर से जांच करानी पड़ रही है।
-राम चंद्र, लोहरामऊ
जांच न होने से परेशानी
पेट संबंधी तकलीफ का इलाज कराने के लिए अमेठी से यहां आया था। ओपीडी में चिकित्सक ने अल्ट्रासाउंड जांच के लिए लिखा है। अस्पताल में जांच न हो पाने से अब बाहर जाकर निजी केंद्र पर जांच कराने की परेशानी उठानी पड़ेगी।
एक तरफ सरकार अस्पतालों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने का दावा करती है। वहीं दूसरी तरफ साल भर से अस्पताल में एक रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती तक नहीं हो पा रही। अल्ट्रासाउंड के मरीजों की जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग को व्यवस्था करनी चाहिए।
-साबिर खान, तातोमुरैनी
सिटी स्कैन की मदद से हो रहा इलाज
अस्पताल में जांच सुविधा न हो पाने के कारण सामान्य मरीजों को अल्ट्रासाउंड जांच के लिए नहीं लिखा जा रहा है। मरीजों की सहमति के बाद ही निजी केंद्र पर जांच के लिए भेजा जाता है। जरूरतमंद मरीजों का इलाज अस्पताल के ट्राॅमा सेंटर में उपलब्ध सिटी स्कैन से पेट की जांच कर किया जा रहा है।
- डॉ. अनिल कुमार फिजीशियन