सुल्तानपुर। ग्यारह वर्ष पूर्व हुई हत्या के मामले में एडीजे चतुर्थ अभय श्रीवास्तव ने शुक्रवार को दो आरोपियों को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। कोर्ट ने आरोपियों पर 1.30 लाख रुपये का जुर्माना भी किया है।
मामला कोतवाली देहात थाने के लोहरामऊ गांव से जुड़ा है। एडीजीसी क्रिमिनल विजय शंकर शुक्ला के मुताबिक लोहरामऊ गांव निवासी देवीदीन के पुत्र संतोष बनवासी की 12 जुलाई 2011 को हत्या कर सबूत मिटाने के लिए शव गांव स्थित तालाब में फेंक दिया गया था। 14 जुलाई को तालाब से शव बरामद किया गया था। घटना के पीछे रंजिश प्रमुख कारण बताया जा रहा है।
आरोपी संतराम उर्फ ननकुटे शहर में चोरी के एक मामले में जेल गया था। उसे शंका थी कि संतोष बनवासी ने उसकी मुखबिरी करके जेल भेजवाया था। जेल से छूटने के बाद संतोष को संतराम जान से मारने की धमकी दे रहा था। घटना के दिन 12 जुलाई 2011 को लोहरामऊ निवासी संतराम अपने साथी सुदापुर निवासी जोखू प्रसाद व लाखीपुर निवासी सुनील कुमार के साथ संतोष के घर गया था और उसे बहाना बनाकर अपने साथ ले गया था।
तीनों आरोपियों ने संतोष की हत्या करके सबूत मिटाने के लिए शव तालाब में फेंक दिया था। पुलिस ने मृतक के पिता देवीदीन की तहरीर पर तीनों आरोपियों के खिलाफ अपहरण, हत्या और सबूत मिटाने का केस दर्ज किया था।
मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से पांच गवाह कोर्ट में पेश किए गए। शुक्रवार को कोर्ट ने आरोपियों संतराम उर्फ ननकुट्टे और जोखू प्रसाद को सजा सुनाकर जेल भेज दिया। आरोपी सुनील कुमार की मुकदमे के दौरान मौत हो चुकी है।