सुल्तानपुर। जिले में कोरोना का कहर कम होने का नाम नहीं ले रहा है। दो दिनों में परिषदीय स्कूल की प्रधानाध्यापिका समेत दो शिक्षिकाओं की मौत हो गई। शिक्षिकाओं की मौत से अध्यापकों में शोक की लहर दौड़ गई है।
शहर के डिहवा मोहल्ले के प्राइमरी स्कूल में फरीदा सिद्दीकी प्रधानध्यापिका के पद पर तैनात थीं। वे एजुकेशन कॉलोनी में रहती थीं। पति मुशीर अहमद के अनुसार 19 अप्रैल को होने वाले पंचायत चुनाव से पहले जब फरीदा सिद्दीकी ट्रेनिंग में गई तो उन्हें बुखार आ गया था।
उनकी ड्यूटी दोस्तपुर ब्लॉक के प्राथमिक पाठशाला मुस्तफाबाद कलां में लगी थी। पति मुशीर के अनुसार बुखार की अवस्था में पत्नी ड्यूटी के लिए तैयार नहीं थीं। आरओ और कादीपुर की नायब तहसीलदार से ड्यूटी काटने का निवेदन भी किया था लेकिन नहीं कटी।
आखिर में उन्होंने ड्यूटी की। चुनाव से लौटने के बाद तबीयत बिगड़ गई। हॉस्पिटल में जगह नहीं मिली तो घर पर ही तीन चार दिन इलाज कराया। बाद में परिवारीजन फरीदा को बेहतर इलाज के लिए लेकर प्रयागराज चले गए। वहां उनका इलाज होने लगा।
इलाज के बाद कुछ सुधार भी हुआ लेकिन 30 अप्रैल को एकाएक उनकी तबीयत बिगड़ गई और अंत में उन्होंने सदा के लिए आंखें बंद कर लीं। कोविड प्रोटोकॉल के चलते उनकी प्रयागराज में ही जनाजे की नमाज पढ़ी गई और फिर सुपुर्द-ए-खाक किया गया।
फरीदा सिद्दीकी के पति मुशीर बताते हैं कि हमारे 23 साल की एक बेटी है जो बचपन से ही दोनों पैरों से चलने में असमर्थ है। पत्नी ही उसका ख्याल रखती थी। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ी तो मैं इस मामले में कोर्ट तक जाऊंगा।
उधर, भदैंया के उच्च प्राथमिक विद्यालय रामपुर की सहायक अध्यापिका और मास्टर ट्रेनर डॉ. रागिनी मिश्रा का भी कोरोना से निधन हो गया। एक कुशल शिक्षिका व प्रशिक्षिका के निधन से शिक्षकों में शोक की लहर दौड़ गई है। डॉ. रागिनी के दो बेटी व एक बेटा है। उनके पति डॉ. एसपी मिश्रा गनपत सहाय पीजी कॉलेज में एसोसिएट प्रोफेसर हैं।
डॉ. रागिनी 2011 से 2017 तक भदैंया की सह समन्वयक रहीं। कुछ समय तक वह एबीआरसी कुड़वार रहीं। 2003 से वे लगातार जनपद स्तरीय व ब्लॉक स्तरीय प्रशिक्षणों में अपना योगदान देती रहीं। शिक्षक नेता रणवीर सिंह ने बताया कि प्रशिक्षणों में उनके प्रेरणा गीत शिक्षकों को बेहतर करने के लिए प्रेरित करते थे।