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दो दशक बाद फिर गूंजी गुंगवाछ कंबल कारखाने में मशीनों की घरघराहट

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अमेठी। स्थानीय विधानसभा क्षेत्र के गुंगवाछ गांव में स्थित कंबल कारखाने में करीब दो दशक बाद फिर मशीनों के घरघराहट शुरू हो गई है। पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने इस कंबल कारखाने की आधारशिला रखी थी।
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कंबल कारखाना वर्ष 2000 में भाजपा सरकार के दौरान बंद हो गया था। अब दोबारा कंबल कारखाना शुरू होने से लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे।
पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने वर्ष 1983 में विधानसभा क्षेत्र के गुंगवाछ गांव में कंबल कारखाने की आधारशिला रखी थी। गांव के तत्कालीन ग्राम प्रधान लाल बहादुर सिंह ने कंबल कारखाने की स्थापना के लिए नौ बीघा भूमि उपलब्ध कराई थी।
32 लाख रुपये की लागत से कंबल कारखाना वर्ष 1984 में बनकर तैयार हुआ। कंबल कारखाने में एक वॉशिंग मशीन, एक रेजिंग मशीन, एक ऊन धुनाई मशीन और कंबल बुनाई के लिए पांच हथकरघा लगाए गए थे।
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कंबल कारखाने में सूत काटकर उपलब्ध कराए जाने के लिए पांच सेंटर (गुंगवाछ, कस्तूरीपुर, भीमी, रानीपुर, धौरहरा गांव) स्थापित किए गए। प्रति सेंटर पर 50-50 चरखे सूत काटने के लिए दिए गए।
कंबल कारखाने में पांच नियमित व 13 संविदा कर्मी थे। वहीं करीब 300 परिवारों को जीविकोपार्जन का साधन मिला था। वर्ष 2000 में कंबल कारखाना भाजपा सरकार के दौरान उपेक्षा के कारण बंद हो गया।
उसके बाद करीब दो वर्ष तक इससे जुडे कर्मी कंबल कारखाने के चलने के इंतजार में बैठे रहे लेकिन इसी बीच उन्हें बोर्ड की ओर से नोटिस देने के बाद कंबल कारखाना पूर्ण रूप से बंद कर दिया गया।
क्षेत्र के लोगों की मांग पर स्थानीय विधायक गरिमा सिंह के प्रयास से मुख्यमंत्री के निर्देश पर कंबल कारखाना फिर से शुरू हो गया लेकिन अब पहले वाली बात नहीं है। सूत कताई के लिए गांव-गांव सेंटर नहीं बनाए जाएंगे। सेंटर बनने से स्थानीय लोगों को रोजगार का अवसर मिलता था।
अब बाहर से तैयार सूत कंबल कारखाने में आएगा और बुनकर उससे कंबल तैयार करेंगे। इस इकाई में पुराने पांच हथकरघे और पांच नए हथकरघे स्थापित किए गए हैं जिसमें करीब 15 बुनकरों को रोजगार मिलेगा। वर्तमान में कंबल कारखाने में चार नियमित और एक संविदा चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की तैनाती की गई है।
जिला खादी ग्रामोद्योग अधिकारी राकेश कुमार पांडेय ने बताया कि 20 वर्षों से बंद पड़ा कंबल कारखाना मुख्यमंत्री के निर्देश पर बुधवार से संचालित हो गया है। कंबलों की बुनाई का कार्य जिले के स्थानीय बुनकर करेंगे।
बुनकरों को प्रति कंबल 100 रुपये की दर से भुगतान किया जाएगा। एक दिन में एक बुनकर लगभग छह से सात कंबल की बुनाई करेगा, जिससे प्रति बुनकर को प्रतिदिन 600 से 700 तक रुपये की आमदनी होगी।
इस कंबल कारखाने में केवल बुनाई का कार्य होगा, जिसकी फिनिशिंग, रेजिंग, वॉशिंग का कार्य कंबल कारखाना मिर्जापुर एवं गोपीगंज में कराया जाएगा। धीरे-धीरे फिनिशिंग, रेजिंग, वॉशिंग का कार्य भी इस कंबल कारखाने में ही कराया जाएगा। काम बढने के साथ और कर्मचारियों की तैनाती होगी।
पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के समय में अमेठी में विकास की आंधी तेजी से चली। संसदीय क्षेत्र के औद्योगिक क्षेत्र जगदीशपुर, कठौरा, टिकरिया, कौहार, त्रिसुंडी सहित कई स्थानों पर बड़ी-बड़ी फैक्टरियां एवं उद्योग लगे, जिसमें क्षेत्र के लोगों को बड़ी संख्या में रोजगार मिला।
धीरे-धीरे औद्योगिक इकाइयां दम तोड़ती गईं। सरकार और जन प्रतिनिधियों की उदासीनता के चलते दर्जनों इकाइयां बंद हो गईं। इनमें कुछ नीलाम भी चुकी हैं।
जगदीशपुर में संचालित आरिफ व जगदीशपुर सीमेंट फैक्टरी, एग्रो पेपर मिल, सोना वेल्ट, जूता फैक्टरी, गौरीगंज में ऊषा फैक्टरी, सम्राट साइकिल, गोमती सीमेंट, अमेठी टेक्सटाइल सहित तमाम फैक्टरियां बंद हो चुकी हैं।
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