मेडिकल काॅलेज में क्लब फुट बच्चों के साथ तीमारदार।-स्रोत अस्पताल
अमहट। समय पर उचित इलाज मिलने से क्लब फुट (जन्मजात पैर का टेंढ़ा होना) की व्याधि से प्रभावित बच्चों को छुटकारा दिलाया जा सकता है। यह जानकारी मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अविनाश चंद्र गुप्ता ने दी। वह विश्व क्लब फुट दिवस पर शनिवार को मेडिकल कॉलेज परिसर में क्लब फुट पीड़ित बच्चों और उनके परिजनों के लिए आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में हिस्सेदारी कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि यदि क्लब फुट का इलाज समय रहते शुरू कर दिया जाए तो बच्चों को दिव्यांगता से बचाया जा सकता है और वह सामान्य जीवन जी सकते हैं। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग और अनुष्का फाउंडेशन मिलकर प्रभावित बच्चों को उपचार और सहयोग उपलब्ध करा रहे हैं। अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. राहुल ने बताया कि क्लब फुट एक जन्मजात बीमारी है, जिसमें बच्चे के पैर जन्म के समय अंदर की ओर मुड़े होते हैं। यह समस्या लगभग हर 800 नवजात शिशुओं में से एक में पाई जाती है। समय पर उपचार मिलने पर बच्चे पूरी तरह स्वस्थ और सक्रिय जीवन जी सकते हैं।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत ऐसे बच्चों की पहचान कर उन्हें सरकारी अस्पतालों में इलाज के लिए भेजा जाता है। मेडिकल कॉलेज में क्लब फुट के मरीजों के लिए हर शनिवार को विशेष क्लीनिक संचालित होती है। आरबीएसके मैनेजर डॉ. मीर अली ने बताया कि जिले में 202 बच्चे उपचार प्राप्त कर रहे हैं, जबकि 30 बच्चे सफलतापूर्वक स्वस्थ हो चुके हैं। क्लब फुट की पहचान और रेफरल के लिए 60 आशा कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित किया गया है।