सुल्तानपुर। शहर के सीताकुंड घाट के पास स्थित पारिजात वृक्ष आस्था का केंद्र बना है। सावन माह में यहां युवतियों और महिलाओं की भीड़ उमड़ती है। महाशिवरात्रि पर्व पर पूरा शहर यहां उमड़ पड़ता है। यहां जलाभिषेक कर धागा बांधने का रिवाज है। यहां पर कोई शिव मंदिर तो नहीं लेकिन शिवलिंग की स्थापना की गई है। साथ ही सैकड़ों वर्ष पुराने कल्पवृक्ष (पारिजात) के बचाने के लिए विभिन्न संगठन व जिला प्रशासन की ओर से चबूतरा आदि बनाया गया है।
धागा बांधने से पूरी होती मन्नत
शहर के सीताकुंड स्थित जिला उद्योग केंद्र परिसर में पारिजात वृक्ष स्थित है। वेद-पुराणों में पारिजात वृक्ष का महात्म्य बताया गया है। यहां सैकड़ों वर्ष पहले शिवलिंग की स्थापना कर लोग पूजा-पाठ करते थे। धीरे-धीरे लोगों की आस्था बढ़ती गई। वर्तमान में यहां पर शिवलिंग व अन्य देवी देवताओं की मूर्तियां स्थापित कर दी गई हैं।
लोग यहां जलाभिषेक के बाद वृक्ष पर धागा बांधते हैं। मान्यता है कि यहां जलाभिषेक के बाद किसी मन्नत को लेकर धागा बांधने वालों की मनोकामना जल्द ही पूरी हो जाती है। मन्नतें पूरी होने के बाद धागा छोड़ दिया जाता है। प्रत्येक सोमवार, सावन माह और अधिकमास (मलमास) को यहां श्रद्घालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। युगल जोड़े, युवतियां, महिलाएं यहां बड़ी संख्या में जल चढ़ाने पहुंचते हैं।