जिले भर में हुई 22 हजार 93 प्रसूताओं की जांच में तीन हजार महिलाएं हाई रिस्क प्रेगनेंसी की चपेट में पाई गईं। इसमें अधिकतर खून की कमी के साथ ही कुुपोषण की शिकार हैं। इस आंकड़े से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा है।
सूबे में गभर्वती महिलाओं की प्रसव के दौरान हो रही मौतों को लेकर शासन से लेकर स्वास्थ्य विभाग तक परेशान है।
शासन के निर्देश पर गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित प्रसव कराने के लिए 27 जनवरी से तीन मार्च तक मातृत्व सप्ताह का आयोजन हुआ था। इस दौरान स्वास्थ्य विभाग ने 22 हजार 93 गर्भवती महिलाओं का स्वास्थ्य परीक्षण किया। चौंकाने वाली बात यह है कि जांच के दौरान तीन हजार गर्भवती महिलाएं हाई रिस्क प्रेगनेंसी की श्रेणी (जटिल प्रसव) में पाई गई हैं।
मातृत्व सप्ताह के आयोजन का उद्देश्य
सुल्तानपुर। गर्भवती महिलाओं में महिला संबंधी रोग व कुपोषण की रोकथाम करना। महिला का उपचार कर उसका सही स्थान पर सुरक्षित प्रसव कराना, ताकि जच्चा-बच्चा दोनों सुरक्षित रह सकें।
चिह्नित महिलाओं को दी जाने वाली सुविधाएं
सुल्तानपुर। मातृत्व सप्ताह के तहत चिह्नित की गई गर्भवती महिलाओं का प्रसव से पूर्व तीन से चार बार स्वास्थ्य परीक्षण किया जाना। इसके तहत वजन, खून की जांच, हीमोग्लोबिन की मात्रा का पता करना। खान-पान की व्यवस्था देने का प्रावधान है।