सुल्तानपुर के प्रधान डाकघर में खाता खुलवाने के लिए लगी लोगों की कतार।
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नोटबंदी के बाद डाकघरों के दिन बहुर गए हैं। बैंकों में नए खाते खुलने में हो रही कठिनाई को देखते हुए लोगों की भीड़ डाकघरों की ओर घूम गई है। इसका नतीजा यह हुआ है कि आठ नवंबर को नोटबंदी के बाद से जिले के प्रधान डाकघर समेत अन्य उप-डाकघरों में तीन हजार नए अकाउंट खुल गए। नोटबंदी के बाद डाक विभाग ने 20 लाख रुपये के नोटों की अदला-बदली की है। 18 दिनों के भीतर डाकघरों में 14 करोड़ रुपये जमा कराए गए हैं।
अमूमन डाकघरों में सेविंग अकाउंट खोलवाने से घबराने वाले लोगों की भीड़ नोटबंदी के बाद से डाकघरों की ओर आकर्षित हुई है। डाकघरों में खाता खुलवाने के लिए रोजाना लोगों की भीड़ उमड़ रही है। जहां अन्य बैंकों में नोटबंदी के बाद नए खाते खोलने का कार्य तकरीबन ठप है, वहीं डाकघर में खाता खुलवाने की प्रक्रिया तेज हो गई है। लोगों के बचत व अन्य खाता खुलवाने से डाकघरों के दिन बहुर गए हैं।
पांच लाख खाताधारक ः जिले में प्रधान डाकघर समेत कुल 50 उप-डाकघर की शाखाओं का संचालन किया जा रहा है। प्रधान डाकघर के आंकड़ों के मुताबिक अब तक डाक विभाग में बचत, चालू खाता, आरडी समेत अन्य खातों के करीब पांच लाख खाताधारक हैं।
दोगुना से अधिक हुई वृद्धि ः प्रधान डाकघर के पोस्टमास्टर अमरनाथ ने बताया कि नए खाते खोलने के मामले में डाकघरों में सामान्य तौर पर दोगुना से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। जिले के डाकघरों में नए खाते खोलने का मासिक औसत 1500 है जबकि 18 दिनों में ही तीन हजार अकाउंट खुल गए। इनमें अधिकतर लोगों ने बचत खाते खुलवाए हैं। डाक विभाग की ओर से दी गई सुविधा जनता को रास आ रही है।
50 रुपये में खुल रहा बचत खाता ः बचत खाते के लिए न्यूनतम 50 रुपये से खाता खुलवाने की व्यवस्था डाक विभाग की ओर से दी गई है। चेक के माध्यम से खाता खुलवाने की सीमा न्यूनतम 500 रुपये है। चालू खाते खुलवाने के लिए कोई सीमा निर्धारित नहीं है।
16 दिन में 20 लाख रुपये के नोट बदले ः विभागीय आंकड़ों के मुताबिक नोटबंदी का आदेश जारी होने के बाद 24 नवंबर तक करीब 20 लाख रुपये के नोटों की अदला-बदली की गई। इसमें करीब 12 लाख रुपये 500 रुपये के नोट हैं जबकि शेष एक हजार के नोट की रकम है। अब डाकघर की कुल शाखाओं में जमा धन के आंकड़े पर गौर किया जाय, तो पिछले 18 दिनों में करीब 14 करोड़ रुपये जमा किए गए।