पांच वर्ष पूर्व गठित अमेठी में जिला एवं सत्र न्यायालय शुरू करने के लिए जिला प्रशासन की ओर से भेजे गए प्रस्ताव पर हाईकोर्ट की मुहर लग गई है। हाईकोर्ट ने प्रस्ताव को मंजूर करते हुए जिला प्रशासन की ओर से प्रस्तावित स्थल (बीएसए दफ्तर) पर चल रहे कार्यालय को तत्काल अन्यत्र स्थानांतरित करने का आदेश दिया है।
करीब तीन माह के अंदर स्कूल की अस्थाई बिल्डिंग में दीवानी न्यायालय की सात कोर्ट मुकदमों की सुनवाई शुरू कर देगी। सुल्तानपुर की तीन और रायबरेली की दो तहसीलों को काटकर एक जुलाई 2010 को अमेठी छत्रपति शाहूजी महाराज नगर नाम से जिले का गठन हुआ था।
हालांकि बाद में मौजूदा सरकार ने न सिर्फ सलोन तहसील को पुन: रायबरेली में शामिल कर दिया बल्कि उसके पहले जिले का नाम बदलकर अमेठी कर दिया। जिला बनने के करीब साढ़े पांच वर्ष बाद भी अभी तिलोई के लोग न्यायालय के काम से रायबरेली तो अमेठी, मुसाफिरखाना और गौरीगंज के लोग सुल्तानपुर जिले का चक्कर काटते हैं।
यह स्थिति तब है जब करीब तीन वर्षों से भी ज्यादा समय से जिले में जिला जज व उनके साथ स्टाफ की तैनाती की जा चुकी है। लोगों की इस परेशानी को दूर करने के लिए लगातार सक्रिय जिला प्रशासन ने बीते दिनों हाईकोर्ट को प्रस्ताव भेज जिले में जल्दी जिला एवं सत्र न्यायालय (दीवानी) प्रारंभ करने की अनुमति देने का अनुरोध किया था।
जिला प्रशासन का अनुरोध पत्र मिलने के बाद हाईकोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर कमेटी के ओएसडी जेके सिंह ने जिले का दौरा कर प्रशासन की ओर से प्रस्तावित भवन (बीएसए कार्यालय) का निरीक्षण किया था। ओएसडी ने जिला जज एसपी सिंह व डीएम जगतराज त्रिपाठी की मौजूदगी में हुए इस निरीक्षण की रिपोर्ट उच्च न्यायालय को सौंपी थी।
ओएसडी की निरीक्षण रिपोर्ट मिलने के बाद हाईकोर्ट ने अमेठी में सत्र न्यायालय के तहत जिला जज, सीजेएम, तीन मुंसिफ मजिस्ट्रेट कोर्ट, एजेएम कोर्ट और फैमिली कोर्ट का संचालन शुरू करने की अनुमति दी है।
जल्द हटेगा बीएसए दफ्तर
जिला सत्र एवं न्यायालय के संचालन संबंध में हाईकोर्ट की अनुमति मिलने की बात स्वीकार करते हुए डीएम जगतराज त्रिपाठी ने कहा कि जल्द ही बीएसए दफ्तर को अन्यत्र स्थानांतरित किया जाएगा।